Maa Baglamukhi Story: आखिर क्यों मां पीतांबरा खींचती हैं शत्रु की जीभ? जानें अनसुना रहस्य

Edited By Updated: 23 Apr, 2026 11:44 AM

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Pitambara Devi Story: बगलामुखी जयंती 2026 पर जानें मां पीतांबरा और मदन असुर की वो कहानी, जिसमें छिपा है शत्रु की जीभ खींचने और स्तंभन शक्ति का असली रहस्य।

Pitambara Devi Story: सनातन धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिनमें आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी अपनी उग्र और अद्भुत मुद्रा के लिए जानी जाती हैं। 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार को देशभर में मां बगलामुखी की जयंती बड़ी श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। अक्सर तस्वीरों में मां को एक हाथ में गदा लिए और दूसरे हाथ से शत्रु की जीभ खींचते हुए देखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ब्रह्मांड की रचयिता एक मां को आखिर शत्रु की जीभ खींचने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस पौराणिक कथा और आध्यात्मिक रहस्य के बारे में, जो आपके जीवन के शत्रुओं का नाश करने की शक्ति रखता है।

हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुईं 'पीतांबरा'
शत्रुनाशक देवी बगलामुखी को देवी माता पार्वती का ही उग्र रूप बताया जाता है। इनके बारे में पौराणिक कथा के अनुसार जानकारी मिलती है कि सत युग में सृष्टि पर आए भारी तूफान के कारण सभी प्राणियों को प्रलय का सामना करना पड़ा था। तब त्राहि-त्राहि मच गई थी, उस समय भगवान विष्णु पृथ्वी की आपदा के निवारण के लिए आगे आए थे और देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए सौराष्ट्र क्षेत्र के हरिद्रा सरोवर के निकट उन्होंने घोर तपस्या भी की थी।

भगवान विष्णु द्वारा की गई तपस्या से प्रसन्न होकर देवी, बगलामुखी के रूप में हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुई थीं और उसी ने समस्त ब्रह्मांड के विनाश को रोक कर प्राणियों की रक्षा की थी।

कहते हैं लंकापति रावण भी शत्रुओं के विनाश के लिए देवी बगलामुखी की ही पूजा किया करता था। इसी तरह से पांडव भी अपने अज्ञातवास के समय अपनी रक्षा हेतु आराध्य देवी बगलामुखी की ही पूजा किया करते थे। बताया जाता है कि बगला शब्द की उत्पति ‘वल्या’ से बताई जाती है, जिसका अर्थ लगाम है। कुछ भी हो देवी बगलामुखी के वैसे भी 108 नाम जाने जाते हैं, जो देवी की शक्तियों का परिचय देते हैं। 

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जब मदन असुर की 'वाणी' बन गई थी काल
एक पौराणिक कथा के अनुसार पता चलता है कि मदन, जिसे काम देव का रूप भी बताया जाता है, को ब्रह्मदेव से वाक सिद्धि का वरदान प्राप्त था। जिसके परिणामस्वरूप वह जो कहता वह सच हो जाता था। इसी सिद्धि का वह दुरुपयोग मानव जाति पर करते हुए, उन्हें परेशान करता रहता था।
 
जीभ खींचने के पीछे का गहरा रहस्य (स्तंभन शक्ति)
मानव समाज के दुख को समझते हुए सभी देवी-देवताओं ने देवी बगलामुखी से इससे छुटकारे के लिए आराधना की। परिणामस्वरूप, देवी बगलामुखी ने राक्षस मदन की जिह्वा ही पकड़ ली और उसकी वाक शक्ति को ही अपने वश में कर लिया। राक्षस मदन ने अपनी गलती को मान कर देवी से क्षमा याचना करते हुए माफी मांग ली लेकिन मरते-मरते वह देवी से कहने लगा कि मेरी पूजा भी आपके साथ होनी चाहिए।

देवी बगलामुखी ने यह वरदान उसे मरने पर दे ही दिया। क्योंकि राक्षस मदन देवी की दयालुता और भक्ति से भली-भांति परिचित था। उसे यह भी मालूम था कि देवी बगलामुखी की पूजा से शत्रुओं का नाश तो होता ही है और यदि साथ में उसकी पूजा होगी तो उसके शत्रुओं का भी नाश होगा।

वाणी पर नियंत्रण: जीभ हमारे अहंकार और कड़वे वचनों का केंद्र है। मां का यह स्वरूप हमें सिखाता है कि अनियंत्रित वाणी ही हमारे विनाश का कारण बनती है।

षड्यंत्रों का नाश: तांत्रिक मान्यताओं के अनुसार, मां शत्रु की बोलती बंद कर देती हैं ताकि वह आपके विरुद्ध कोई साजिश न रच सके।

भीतर के शत्रुओं का अंत: आध्यात्मिक दृष्टि से, मां हमारे भीतर के काम, क्रोध और लोभ जैसे शत्रुओं को मौन कर आत्मज्ञान का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

इस जयंती पर मां पीतांबरा की आराधना करने से न केवल बाहरी शत्रुओं बल्कि मानसिक विकारों पर भी विजय प्राप्त होती है।

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