Edited By Sarita Thapa,Updated: 17 Apr, 2026 02:16 PM

एक समय महात्मा गांधी और स्वतंत्रता सेनानी खान अब्दुल गफ्फार खान एक साथ जेल में बंद थे। वहां बंद सभी कैदी और आंदोलनकारी गांधी जी का आदर करते थे। लेकिन दूसरी तरफ गांधी जी जेलर के सामने आने पर अन्य कैदियों के साथ खुद भी सम्मान में खड़े हो जाते थे।
Mahatma Gandhi Story : एक समय महात्मा गांधी और स्वतंत्रता सेनानी खान अब्दुल गफ्फार खान एक साथ जेल में बंद थे। वहां बंद सभी कैदी और आंदोलनकारी गांधी जी का आदर करते थे। लेकिन दूसरी तरफ गांधी जी जेलर के सामने आने पर अन्य कैदियों के साथ खुद भी सम्मान में खड़े हो जाते थे। यह बात खान को पसंद नहीं थी। एक दिन उन्होंने गांधी जी से कहा हम राजनीतिक कैदी हैं। हमें औरों के साथ खड़े होने की आवश्यकता नहीं है।
गांधी जी ने बात टाल दी। कुछ दिनों के बाद खान ने फिर कहा, ‘‘मैं सब समझता हूं। आप जेल में मिलने वाली अतिरिक्त सुविधाओं के कारण जेलर का सम्मान करते हैं। वह आपको हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त गुजराती के अखबार भी दे जाता है, फिर आपके भोजन का भी वह खास ख्याल रखता है। यही बात है न?’’

इस पर गांधी जी ने बड़े प्यार से उन्हें समझाया,‘‘देखो भाई, हम जिस व्यवस्था में रह रहे हैं उसके नियमों का सम्मान करना चाहिए। फिर हमारा संघर्ष भी एक नई व्यवस्था के लिए ही है। अगर हमारे भीतर नियम-कायदों के प्रति आदर का भाव नहीं रहेगा तो हम अराजकता को रोक नहीं पाएंगे।
गांधी जी ने उस दिन से एक अखबार के अलावा सभी अखबार बंद कर दिए और समान रूप से अन्य कैदियों की तरह ही भोजन करने लगे। लेकिन उन्होंने अधिकारियों का सम्मान नहीं छोड़ा। खान साहब को अपनी भूल का एहसास हो गया। उन्होंने गांधी जी से क्षमा मांगी और खुद भी जेल के अनुशासन के मुताबिक चलने लगे।

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