Edited By Sarita Thapa,Updated: 15 Apr, 2026 03:49 PM

सिकंदर एक राजा को जीतकर जब अपने नगर में प्रवेश कर रहा था तो हजारों लोग दोनों ओर कतार में स्वागत के लिए खड़े थे।
Motivational Story : सिकंदर एक राजा को जीतकर जब अपने नगर में प्रवेश कर रहा था तो हजारों लोग दोनों ओर कतार में स्वागत के लिए खड़े थे। वे सब एकटक सिकंदर की ओर देख रहे थे कि उसकी एक दृष्टि उन पर पड़ जाए और वे निहाल, धन्य हो जाएं। सिकंदर ने यह दृश्य देखा और बहुत प्रसन्न हुआ। लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए वह आगे बढ़ा। थोड़ी दूर गया तो उसने देखा कि सामने से फकीरों की एक टोली आ रही है।
सिकंदर उधर से गुजरा मगर फकीरों ने उसकी ओर ध्यान भी नहीं दिया। नाराज सिकंदर ने आदेश दिया इन्हें बंदी बनाकर लाओ। सिपाही गए और फकीरों को पकड़ लाए सिकंदर के सामने। फिर भी वे निडर खड़े रहे। सिकंदर ने गुस्से से देखा और कहा, “तुम नहीं जानते कि विश्व विजेता सिकंदर तुम्हारे सामने से गुजर रहा है?”
सिकंदर की नाराजगी से बेखबर फकीरों ने कहा, “हमें क्या जरूरत है पता रखने की?”

सिकंदर ने घमंड के साथ कहा, “इसलिए कि मैं विश्व-विजयी हूं।”
इस बार फकीरों में से एक ने पूछा, “क्यों करते हो विश्व-विजय?
इसलिए न कि तुम्हारे मन में एक प्यास है, लालसा है। तुम देख नहीं पा रहे कि हमने उस लालसा को मिटा दिया जो लालसा तुम्हारे सिर पर सवार है, तुम्हें दुनिया की खाक छानने पर मजबूर कर रही है, वह लालसा हमारे पैरों की दासी है। साफ शब्दों में समझो कि तुम हमारी उस दासी के दास हो। इसके बावजूद चाहते हो कि हम तुम्हें नमस्कार करें, तुम्हारे सामने झुकें। बात कुछ अजीब नहीं लगती तुम्हें?”
सिकंदर को सत्य का ज्ञान हो चुका था। उसका सारा घमंड चूर हो गया था। उसने तत्काल सभी फकीरों को मुक्त करने का आदेश दिया और झुक कर उन सबसे माफी मांगी।

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