Edited By Sarita Thapa,Updated: 19 Oct, 2026 07:29 AM

नवरात्रों के दौरान वैष्णो देवी भवन जाने वाले श्रद्धालुओं का तांता देखने को मिल रहा है। इसी के तहत वैष्णो देवी यात्रा के मुख्य पड़ाव भूमिका मंदिर परिसर में भी श्रद्धालु दर्शनों के लिए प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।
Bhumika Mandir Vaishno Devi Yatra : नवरात्रों के दौरान वैष्णो देवी भवन जाने वाले श्रद्धालुओं का तांता देखने को मिल रहा है। इसी के तहत वैष्णो देवी यात्रा के मुख्य पड़ाव भूमिका मंदिर परिसर में भी श्रद्धालु दर्शनों के लिए प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। भूमिका मंदिर आधार शिविर कटड़ा से करीब एक कि.मी. दूरी पर स्थित है। यहां श्री माता वैष्णो देवी जी के परम भक्त श्रीधर रहते थे।
उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय थी, परंतु मां वैष्णो देवी जी के प्रति उनके मन में गहरी आस्था व श्रद्धा के चलते उनका परिवार अत्यंत सुखी था। पौराणिक कथा के अनुसार भूमिका मंदिर परिसर में मां वैष्णवी ने एक दिव्य कन्या के रूप में बाबा श्रीधर को दर्शन दिए। मां ने उन्हें आदेश दिया कि वह वैष्णव भंडारे का आयोजन करें तथा उसमें सभी विद्वानों व ब्राह्मणों को जरूर आमंत्रित करें।
मां के आदेश केे अनुसार श्रीधर भंडारे के आयोजन में जुट गए। उसके बाद नगर के विद्वानों तथा ब्राह्मणों को आमंत्रित करने पहुंचे, लेकिन उनको चिंता सता रही थी कि वे भंडारे में भोजन की व्यवस्था कैसे करेंगे। सुबह जब वह उठे तो भंडारे की व्यवस्था देख दंग रह गए। भंडारा शुरू हुआ व श्रीधर ब्राह्मणों को भोजन परोसने में जुट गए। बताया जाता है कि भैरो नाथ भी अपने शिष्यों के साथ उस भंडारे में पहुंचे थे।
मान्यता है कि भैरो नाथ द्वारा मांस-मदिरा की मांग करने और माता वैष्णवी से अभद्र व्यवहार करने के कारण माता त्रिकुट पर्वत की ओर प्रस्थान कर गईं। मौजूदा समय में इस प्राचीन भूमिका मंदिर में माता वैष्णो देवी के दर्शन के बाद श्रद्धालु माथा टेककर कन्या पूजन करते हैं। मान्यता है कि इससे मां भगवती भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और श्रद्धालु अपनी यात्रा को संपूर्ण मानते हैं।
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