क्या आपकी सोच तय करती है दुनिया की तस्वीर, महाभारत की इस पौराणिक कथा में छिपा है आपकी हर सोच का सच

Edited By Updated: 12 Jun, 2026 12:41 PM

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पाण्डवों और कौरवों को शस्त्र शिक्षा देते हुए आचार्य द्रोण के मन में उनकी परीक्षा लेने की बात उभर आई। परीक्षा कैसे और किन विषयों में ली जाए, इस पर विचार करते उन्हें एक बात सूझी कि क्यों न इनकी वैचारिक प्रगति और व्यावहारिकता की परीक्षा ली जाए।

Mahabharata Story : पाण्डवों और कौरवों को शस्त्र शिक्षा देते हुए आचार्य द्रोण के मन में उनकी परीक्षा लेने की बात उभर आई। परीक्षा कैसे और किन विषयों में ली जाए, इस पर विचार करते उन्हें एक बात सूझी कि क्यों न इनकी वैचारिक प्रगति और व्यावहारिकता की परीक्षा ली जाए।

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दूसरे दिन प्रातः आचार्य ने राजकुमार दुर्योधन को अपने पास बुलाया और कहा, "वत्स! तुम समाज में से एक अच्छे आदमी की परख करके उसे मेरे सामने उपस्थित करो।" 

दुर्योधन अच्छे आदमी की खोज में निकल पड़ा। कुछ दिनों बाद दुर्योधन वापस आचार्य के पास आया और कहने लगा, "मैंने कई नगरों, गांवों का भ्रमण किया परंतु कहीं कोई अच्छा आदमी नहीं मिला।"

फिर उन्होंने राजकुमार युधिष्ठिर को अपने पास बुलाया और कहा, "बेटा! इस पृथ्वी पर से कोई बुरा आदमी ढूंढ कर ला दो।"

युधिष्ठिर ने कहा, "ठीक है गुरू जी! मैं कोशिश करता हूं।’’ इतना कहने के बाद वह बुरे आदमी की खोज में चल दिए। कुछ दिनों के बाद युधिष्ठिर आचार्य के पास आए।

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आचार्य ने पूछा, "क्या किसी बुरे आदमी को साथ लाए हो?" 

युधिष्ठिर ने कहा, "गुरु जी! मैंने हर जगह बुरे आदमी की खोज की परंतु मुझे कोई बुरा आदमी मिला ही नहीं। इस कारण मैं खाली हाथ लौट आया हूं।"

 सभी शिष्यों ने आचार्य से पूछा, "गुरुवर! क्या कारण है कि दुर्योधन को कोई अच्छा आदमी नहीं मिला और युधिष्ठिर को कोई बुरा व्यक्ति नहीं दिखा।"

आचार्य बोले, "बेटा! जो व्यक्ति जैसा होता है उसे सारे लोग अपने जैसे दिखाई पड़ते हैं। इसलिए दुर्योधन को कोई अच्छा व्यक्ति नहीं मिला और युधिष्ठिर को कोई बुरा आदमी न मिल सका।" यह सुनकर सभी शिष्य संतुष्ट हो गए।

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