Edited By Sarita Thapa,Updated: 06 Aug, 2026 12:42 PM

बात उन दिनों की है जब गांधी जी बिहार के चंपारण में थे। वहां वह किसानों को एकजुट कर रहे थे। उन दिनों अंग्रेज तरह-तरह से किसानों का शोषण करते थे। वे छल से किसानों से नील की खेती का करार कर लेते थे।
Mahatma Gandhi Story : बात उन दिनों की है जब गांधी जी बिहार के चंपारण में थे। वहां वह किसानों को एकजुट कर रहे थे। उन दिनों अंग्रेज तरह-तरह से किसानों का शोषण करते थे। वे छल से किसानों से नील की खेती का करार कर लेते थे। एक बार जो किसान उनके चंगुल में फंस जाता, उससे बाहर निकलना उसके लिए बेहद मुश्किल हो जाता था।
उन्हीं किसानों ने गांधीजी को चंपारण बुलाया था ताकि वह उनकी लड़ाई लड़ सकें। गांधीजी ने पहुंचते ही मोर्चा संभाल लिया। इससे अंग्रेजों में बौखलाहट फैल गई। एक दिन गांधीजी कुछ किसानों के साथ बैठे थे, तभी उन्हें किसी ने बताया कि एक अंग्रेज अधिकारी ने उन्हें मारने के लिए दो अपराधियों से बातचीत की है। यह सुन गांधीजी बस मुस्करा कर रह गए। अगले दिन वह रात को चुपचाप उस अंग्रेज अधिकारी की कोठी पर जा पहुंचे। वह अधिकारी उस समय सोने जा रहा था।
दस्तक के बाद अधिकारी ने दरवाजा खोला तो पाया कि सामने धोती पहने एक आदमी खड़ा है। वह गांधीजी को पहचानता नहीं था। उसने पूछा, ''तुम कौन हो और क्या करने आए हो?''
गांधीजी बोले, ''मैं ही गांधी हूं। मैंने सुना है कि तुम मेरे आंदोलन से घबरा कर मुझे मार डालना चाहते हो।'' अधिकारी सन्न रह गया।
वह समझ नहीं पा रहा था कि अपने मरने की बात कोई इतनी सहजता से कैसे कर सकता है। वह कुछ सोच पाता, इससे पहले ही गांधीजी बोले, ''चाहो तो तुम अपना काम कर सकते हो। मैं अकेला आया हूं और यहां आने की बात मैंने किसी को बताई भी नहीं है।''
अधिकारी अब चुप था। उसने अपने डर को जीतने वाले ऐसे अद्भुत व्यक्ति देखे ही कहां थे। उसने गांधीजी से क्षमा मांगी और कहा, ''आपने मुझे अपराधी होने से बचा लिया।'' वह अंग्रेज अधिकारी गांधीजी का प्रशंसक बन गया।