Mahatma Gandhi manuscripts: भारत में ही रहेंगी 16.2 करोड़ में नीलाम महात्मा गांधी की पांडुलिपियां

Edited By Updated: 22 Aug, 2026 11:53 AM

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महात्मा गांधी के अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को लिखे गए 688 ऑटोग्राफ वाले विचारों के संग्रह को सैफ्रनआर्ट की नीलामी में 16.20 करोड़ रुपए में बेचा गया। यह नीलामी में बिके किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए एक विश्व...

नई दिल्ली (एजैंसी): महात्मा गांधी के अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को लिखे गए 688 ऑटोग्राफ वाले विचारों के संग्रह को सैफ्रनआर्ट की नीलामी में 16.20 करोड़ रुपए में बेचा गया। यह नीलामी में बिके किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए एक विश्व रिकॉर्ड है। 

हिंगोरानी की पत्नी विद्या के निधन के बाद दो साल तक मार्गदर्शन, चिंतन और हौसला बढ़ाने वाले रोजाना हाथ से लिखे संदेशों को बाद में “अ थॉट फॉर द डे” नाम की किताब में संकलित किया गया। ये संदेश दोनों के बीच हुए पत्राचार के सबसे निजी और सुरक्षित बचे हुए दस्तावेजों में से एक हैं। खरीदार की पहचान का हालांकि खुलासा नहीं किया गया, लेकिन नीलामी घर ने कहा कि “खरीदार भारत का ही है और पांडुलिपि देश में ही रहेंगी”। “गांधी: फ्रॉम द कलेक्शन ऑफ आनंद टी. हिंगोरानी” नाम की नीलामी में गांधी से जुड़ी चिट्ठियों, पांडुलिपियों, तस्वीरों और निजी चीजों के 86 खंड शामिल थे। 

सैफ्रनआर्ट के सहसंस्थापक दिनेश वाजीरानी ने एक बयान में कहा, “ ‘खंड 80’- यानी गांधीजी द्वारा हिंगोरानी के लिए लिखे गए विचारों की एक शृंखला - को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया इसके दुर्लभ और ऐतिहासिक महत्व को और पुख्ता करती है।” “मैसेज ऑन गॉड” (ईश्वर पर संदेश) - जिसमें ईश्वर और भगवद् गीता पर गांधी के विचारों से जुड़ी तीन संबंधित पांडुलिपियां और पत्र-व्यवहार शामिल हैं - 1.68 करोड़ रुपए में बिका। 

नीलामी में शामिल निजी चीजों में गांधी का ‘पेटी चरखा’ और सूत कातने के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे दो पत्र शामिल थे, जिनकी कीमत 50-70 लाख रुपए आंकी गई थी। यह 1.02 करोड़ रुपए में बिका। गांधीजी की लिखते हुए एक हस्ताक्षरित तस्वीर 78 लाख रुपए में बिकी और आर्थिक स्वतंत्रता पर गांधीजी के पत्रों, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का एक सेट 57.60 लाख रुपए में बिका। हिंगोरानी परिवार ने पीढ़ियों से इस संग्रह को संभालकर रखा था। इसके जरिए हिंगोरानी के साथ गांधीजी के लंबे समय के रिश्ते को करीब से जानने का मौका मिलता है।

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