Edited By Sarita Thapa,Updated: 17 Jan, 2026 09:14 AM

संगम नगरी में माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव मौनी अमावस्या आने वाला है। इस पावन अवसर पर संगम की रेती पर आस्था का ऐसा महाकुंभ नजर आएगा, जिसकी कल्पना मात्र से रोमांच हो जाता है।
Mauni Amavasya 2026 Prayagraj crowd update : संगम नगरी में माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव मौनी अमावस्या आने वाला है। इस पावन अवसर पर संगम की रेती पर आस्था का ऐसा महाकुंभ नजर आएगा, जिसकी कल्पना मात्र से रोमांच हो जाता है। प्रशासन का अनुमान है कि इस बार करीब 3.5 करोड़ श्रद्धालु त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाएंगे।
सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगा महासंयोग
इस वर्ष की मौनी अमावस्या इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि इस दिन 'सर्वार्थ सिद्धि योग' का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस दुर्लभ योग में किया गया स्नान, दान और पूजन अनंत फलदायी होता है। ग्रहों की यह विशेष स्थिति भक्तों के लिए सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करेगी।
प्रशासन की चाक-चौबंद तैयारी
इतनी विशाल भीड़ के प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और मेला प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्नान घाटों की लंबाई बढ़ाई गई है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल, एटीएस और गोताखोरों की तैनाती की गई है। भीड़ पर नियंत्रण रखने के लिए AI-आधारित क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। लाखों यात्रियों के लिए हजारों अतिरिक्त बसें और स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं।
मौन व्रत और दान का महत्व
शास्त्रों में मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था, इसलिए इसे 'मौनी' अमावस्या कहते हैं। संगम तट पर जप-तप करने से मानसिक क्लेशों से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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