Parma Ekadashi Vrat Katha: मेहनत के बाद भी नहीं टिक रहा पैसा? इस अचूक व्रत से दूर होगी दरिद्रता, पढ़ें कथा

Edited By Updated: 10 Jun, 2026 12:39 PM

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Parma Ekadashi 2026: क्या मेहनत के बाद भी धन की कमी है? जानें पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी का महत्व और कथा, जिससे ब्राह्मण सुमेधा की दरिद्रता दूर हुई थी।

Parma Ekadashi 2026: कई बार मनुष्य कठिन परिश्रम करता है, लेकिन फिर भी उसे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। शास्त्रों में ऐसी स्थिति से उबरने के लिए पुरुषोत्तम मास के कृष्णपक्ष की परमा एकादशी को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यह व्रत न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि दरिद्रता को जड़ से मिटाकर सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

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Parma Ekadashi Vrat Katha परमा एकादशी व्रत कथा: जब एक गरीब ब्राह्मण की भक्ति से प्रसन्न हुए भगवान
प्राचीन काल में काम्पिल्य शहर में सुमेधा नामक एक अत्यंत धर्मी ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ रहता था। वे दोनों इतने गरीब थे कि भिक्षा मांगकर अपना जीवन व्यतीत करते थे। घोर गरीबी के बावजूद पवित्रा एक पतिव्रता और धर्मपरायण स्त्री थी, जो अतिथि सेवा में अपनी भूख तक भूल जाती थी।

एक दिन गरीबी से तंग आकर सुमेधा ने परदेश जाकर धन कमाने की इच्छा जताई। तब उसकी पत्नी ने बड़ी ही मार्मिक बात कही। उसने कहा, "शायद पिछले जन्म में हमने अन्न या भूमि का दान नहीं किया, इसीलिए आज यह स्थिति है। यहां जो मिल रहा है, उसी में संतोष करें।"

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कौण्डिन्य मुनि ने बताया दरिद्रता दूर करने का उपाय
जब उनके घर कौण्डिन्य मुनि पधारे, तो सुमेधा और पवित्रा ने उनका भव्य सत्कार किया। पवित्रा ने मुनि से अपनी गरीबी मिटाने का उपाय पूछा। मुनि ने उन्हें परमा एकादशी के व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि यह तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इसकी उपासना से मनुष्य को पर्याप्त धन और अन्न की प्राप्ति होती है।

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परमा एकादशी व्रत का प्रभाव: रातों-रात बदल गया भाग्य
मुनि की आज्ञा मानकर दोनों ने विधि-विधान से व्रत का पालन किया। व्रत के प्रभाव से उनके यहां एक राजकुमार आया, जिसने उनकी सेवा से खुश होकर उन्हें एक मकान और गाय दान में दी। इस प्रकार परमा एकादशी के पुण्य से उनकी सारी दरिद्रता समाप्त हो गई।

परमा एकादशी महत्व: क्यों है यह एकादशी खास?
शास्त्रों के अनुसार, जैसे मनुष्यों में ब्राह्मण और पशुओं में गाय श्रेष्ठ है, वैसे ही महीनों में पुरुषोत्तम मास और एकादशियों में परमा व पद्मिनी एकादशी सर्वश्रेष्ठ हैं। जो मनुष्य इस दुर्लभ जन्म को पाकर भी एकादशी का व्रत नहीं करते, वे 84 लाख योनियों के चक्र में दुखी रहते हैं इसलिए, जीवन को सफल बनाने और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए।

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