Edited By Sarita Thapa,Updated: 01 Jan, 2026 04:13 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दाहिनी कलाई पर बंधा छोटा सा काला धागा अक्सर चर्चा का विषय रहता है। दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक होने के बावजूद, वह इसे किसी महंगे आभूषण की तरह हमेशा धारण किए रहते हैं।
PM Modi Black Thread Mystery : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दाहिनी कलाई पर बंधा छोटा सा काला धागा अक्सर चर्चा का विषय रहता है। दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक होने के बावजूद, वह इसे किसी महंगे आभूषण की तरह हमेशा धारण किए रहते हैं। इसके पीछे कोई एक नहीं, बल्कि कई धार्मिक और आध्यात्मिक कारण छिपे हैं। तो आइए जानते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दाहिनी कलाई पर बंधें इस रहस्यमयी धागे से जुड़ी खास बातें और मान्यताओं के बारे में-
बुरी नजर से रक्षा
हिंदू धर्म और भारतीय परंपरा में काला धागा 'नजर दोष' से बचने का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि जब कोई व्यक्ति सफलता के शिखर पर होता है, तो उसे लोगों की नकारात्मक ऊर्जा या बुरी नजर प्रभावित कर सकती है। यह धागा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है जो नकारात्मकता को सोख लेता है।
शनि और राहु ग्रहों का संतुलन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार काला रंग शनि देव और राहु से संबंधित है। कलाई पर काला धागा बांधने से इन ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
शनि: अनुशासन, न्याय और कर्म के देवता हैं। यह धागा संघर्षों में धैर्य बनाए रखने में मदद करता है।
राहु: भ्रम और अचानक आने वाली बाधाओं का कारक है। काला धागा राहु के नकारात्मक प्रभाव को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है।

अटूट आस्था और सांस्कृतिक जड़ें
प्रधानमंत्री मोदी अपनी सादगी और भारतीय संस्कृति के प्रति अपने गहरे जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। यह काला धागा उनकी सांस्कृतिक जड़ों और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। यह दिखाता है कि आधुनिकता और तकनीक के दौर में भी वे अपनी प्राचीन परंपराओं का गर्व से पालन करते हैं।
सकारात्मक ऊर्जा का संरक्षण
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी कहा जाता है कि काला रंग ऊर्जा को सोखता है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह धागा शरीर की आंतरिक सकारात्मक ऊर्जा को बाहर जाने से रोकता है और बाहर की बुरी तरंगों को शरीर में प्रवेश करने से पहले ही खत्म कर देता है।
मां शक्ति और आशीर्वाद का प्रसाद
पीएम मोदी मां शक्ति के अनन्य उपासक हैं। कई बार विशेष पूजा-पाठ या अनुष्ठान के बाद संतों या पुजारियों द्वारा आशीर्वाद के रूप में यह धागा बांधा जाता है। इसे एक 'रक्षा सूत्र' या दिव्य प्रसाद के रूप में पहना जाता है, जो उन्हें हर पल दैवीय शक्ति का अहसास कराता रहता है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ