Edited By Prachi Sharma,Updated: 23 Feb, 2026 09:24 AM

Mathura, Vrindavan और पूरे ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव बसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। इस वर्ष 25 फरवरी को Barsana में लड्डू होली और प्रसिद्ध लट्ठमार होली का आयोजन होगा, जबकि 27 फरवरी को Nandgaon में लट्ठमार होली खेली जाएगी। ब्रज की धरती पर...
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Rangili Gali barsana : Mathura, Vrindavan और पूरे ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव बसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। इस वर्ष 25 फरवरी को Barsana में लड्डू होली और प्रसिद्ध लट्ठमार होली का आयोजन होगा, जबकि 27 फरवरी को Nandgaon में लट्ठमार होली खेली जाएगी। ब्रज की धरती पर राधा-कृष्ण के प्रेम की झलक हर ओर देखने को मिलती है इसलिए यहां होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि प्रेम और परंपरा का पर्व है।
बरसाना की लट्ठमार होली का इंतजार देश ही नहीं, विदेशों में बसे श्रद्धालु भी बेसब्री से करते हैं। खास बात यह है कि यह अनोखी होली मुख्य रूप से बरसाना की ‘रंगीली गली’ में खेली जाती है। लगभग 100 मीटर लंबी यह ऐतिहासिक गली ब्रज की सांस्कृतिक विरासत का केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ इसी मार्ग से होकर राधा रानी और गोपियों के संग होली खेलने पहुंचते थे।
लट्ठमार होली से पहले फाल्गुन शुक्ल नवमी को लड्डू होली मनाई जाती है। इस दिन बरसाना की सखियां नंदगांव के ग्वालों को होली खेलने का निमंत्रण देती हैं और मिष्ठान भेंट करती हैं। राधा-कृष्ण के प्रेम से जुड़े गीत गाकर उत्सव का वातावरण और भी भक्तिमय बना दिया जाता है।

इसके बाद नंदगांव के हुरियारे बरसाना पहुंचते हैं, जहां रंगीली गली में परंपरागत अंदाज में होली खेली जाती है। यहां एक अनोखी परंपरा है पुरुषों को केवल अपना बचाव करने की अनुमति होती है, जबकि महिलाएं लाठियों से प्रतीकात्मक प्रहार करती हैं। इस दौरान हंसी-मजाक और मीठी नोकझोंक का माहौल रहता है। गालियां भी यहां परंपरा का हिस्सा मानी जाती हैं, जिन्हें कोई बुरा नहीं मानता।
रंगीली गली में खेली जाने वाली यह होली प्रेम, उल्लास और महिला शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि बरसाना की लट्ठमार होली को ब्रज की सबसे अनोखी और विश्व प्रसिद्ध परंपराओं में गिना जाता है।
