Shakuni Magical Dice Mystery: शकुनि के वध के बाद कहां गए मायावी पासे? महाभारत का अनसुलझा रहस्य

Edited By Updated: 20 Feb, 2026 12:39 PM

shakuni magical dice mystery

Shakuni Magical Dice Mystery: भारतीय महाकाव्य Mahabharata केवल युद्ध और शौर्य की कथा नहीं, बल्कि षड्यंत्र, कूटनीति और मनोवैज्ञानिक चालों की भी गाथा है। इस महागाथा में गांधार नरेश Shakuni को कुटिल नीति और मायावी पासों के लिए जाना जाता है। मान्यता है...

Shakuni Magical Dice Mystery: भारतीय महाकाव्य Mahabharata केवल युद्ध और शौर्य की कथा नहीं, बल्कि षड्यंत्र, कूटनीति और मनोवैज्ञानिक चालों की भी गाथा है। इस महागाथा में गांधार नरेश Shakuni को कुटिल नीति और मायावी पासों के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि शकुनि के पास ऐसे जादुई पासे थे, जो हर बार उसकी इच्छा के अनुसार अंक दिखाते थे। लेकिन जब महाभारत युद्ध में उनका वध हुआ, तब इन पासों का क्या हुआ? यह प्रश्न आज भी एक रहस्य बना हुआ है।

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हड्डियों से बने थे शकुनि के पासे?
पौराणिक कथाओं के अनुसार शकुनि के पासे साधारण नहीं थे। कहा जाता है कि ये पासे उनके पिता गांधार नरेश राजा सुबल की रीढ़ की हड्डी से बनाए गए थे।

कथा के अनुसार, मृत्यु से पूर्व राजा सुबल ने शकुनि को आदेश दिया था कि उनकी हड्डियों से पासे बनवाए जाएं, जिनमें उनकी आत्मा का अंश विद्यमान रहेगा। इसी कारण जब भी शकुनि पासे फेंकता, परिणाम उसके पक्ष में ही आता था।

हालांकि, यह विवरण मुख्यतः लोककथाओं और पुराणों में मिलता है, ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

सहदेव के हाथों हुआ शकुनि का अंत
महाभारत युद्ध के दौरान जब कौरव सेना पराजित होने लगी, तब शकुनि भी रणभूमि में उतरे। पांडवों में सबसे छोटे भाई सहदेव Sahadeva ने प्रतिज्ञा की थी कि वे शकुनि का वध करेंगे। अंततः सहदेव ने युद्धभूमि में शकुनि को मारकर अपना वचन पूरा किया।

 पौराणिक कथाओं के अनुसार, शकुनि की मृत्यु के साथ ही उन पासों की मायावी शक्ति भी समाप्त हो गई।

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पासों के भविष्य को लेकर दो प्रमुख मान्यताएं
भगवान कृष्ण ने नष्ट कर दिए

लोकप्रचलित मान्यता है कि कृष्ण Krishna जानते थे कि ये पासे अधर्म और प्रतिशोध का प्रतीक बन चुके हैं। यदि वे भविष्य में किसी के हाथ लगते, तो फिर से विनाश का कारण बन सकते थे। कुछ कथाओं में उल्लेख मिलता है कि कृष्ण ने उन पासों को कुरुक्षेत्र की भूमि में नष्ट कर दिया या किसी पवित्र जल में प्रवाहित कर दिया।

गांधार वापस ले जाए गए
एक अन्य मान्यता के अनुसार, शकुनि की मृत्यु के बाद गांधार के सैनिक उन पासों को अपने साथ ले गए। किंतु शकुनि के बिना वे पासे केवल साधारण हड्डियों के टुकड़े रह गए और समय के साथ नष्ट हो गए।

क्या आज भी मौजूद हैं वे पासे?
इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का मत है कि शकुनि के “जादुई पासे” संभवतः उनकी रणनीतिक चतुराई, गणितीय कुशलता और मनोवैज्ञानिक प्रभाव का प्रतीक थे। वर्तमान में ऐसे किसी भी मायावी पासों का कोई पुरातात्विक या ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग के अंत के साथ ही ऐसी दिव्य या मायावी वस्तुओं का भी लोप हो गया।

शकुनि के पासे आज भी रहस्य और कल्पना का विषय बने हुए हैं। चाहे वे वास्तव में जादुई रहे हों या केवल प्रतीकात्मक कथा का हिस्सा, लेकिन यह निश्चित है कि महाभारत में उनकी भूमिका ने इतिहास की दिशा बदल दी। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि छल और कूटनीति से प्राप्त विजय अंततः विनाश का कारण बन सकती है।

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