क्यों शनिदेव की पत्नी ने दिया उन्हें श्राप ? पढ़ें इसके पीछे की रहस्यमयी कथा

Edited By Updated: 09 Feb, 2026 04:37 PM

shani dev and his wife story

हिंदू धर्मशास्त्रों में शनिदेव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। उनकी एक दृष्टि मात्र से बड़े-बड़े राजा रंक बन जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शनिदेव की इस मारक दृष्टि के पीछे स्वयं उनकी पत्नी का एक प्राचीन श्राप है।

Shani Dev and His Wife Story : हिंदू धर्मशास्त्रों में शनिदेव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। उनकी एक दृष्टि मात्र से बड़े-बड़े राजा रंक बन जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शनिदेव की इस मारक दृष्टि के पीछे स्वयं उनकी पत्नी का एक प्राचीन श्राप है। अक्सर लोग शनिदेव के प्रकोप से डरते हैं, परंतु इसके मूल में एक ऐसी रहस्यमयी और मर्मस्पर्शी कथा छिपी है, जो उनके पारिवारिक जीवन और उनके द्वारा झेली गई एक विवशता को दर्शाती है। यह कहानी हमें बताती है कि कैसे एक अनजाने में हुई उपेक्षा ने शनिदेव के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया और क्यों वे चाहकर भी किसी की ओर सीधी नजरों से नहीं देखते। तो आइए जानते हैं उस  पौराणिक घटना के बारे में जिसमें शनिदेव की पत्नी के क्रोध और पश्चाताप की अनसुनी दास्तान छिपी है।

Shani Dev and His Wife Story

पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनिदेव का विवाह चित्ररथ की कन्या से हुआ था। वह अत्यंत सती, साध्वी और परम तेजस्वी थी। वह भगवान की परम भक्त भी थीं। एक बार शनिदेव की पत्नी संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर उनके पास पहुंचीं, लेकिन उस समय शनिदेव भगवान श्री कृष्ण के ध्यान में पूरी तरह मग्न थे। वे बाहरी दुनिया से बेखबर अपनी भक्ति में डूबे हुए थे। शनिदेव की पत्नी बहुत देर तक प्रतीक्षा करती रहीं, लेकिन शनिदेव ने अपनी आंखें नहीं खोलीं। अपनी उपेक्षा से आहत और क्रोधित होकर, उन्होंने आवेश में आकर शनिदेव को श्राप दे दिया।

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उन्होंने कहा, "आज से आप जिस भी वस्तु या जीव पर अपनी दृष्टि डालेंगे, उसका विनाश हो जाएगा।"

जब शनिदेव का ध्यान टूटा, तो उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ। उन्होंने अपनी पत्नी को मनाने की कोशिश की और अपनी गलती स्वीकार की। उनकी पत्नी को भी अपने क्रोध पर पश्चाताप हुआ, लेकिन दिया गया श्राप वापस लेना उनके वश में नहीं था।इसी घटना के बाद से शनिदेव अक्सर अपनी दृष्टि नीची रखते हैं। वे नहीं चाहते कि उनकी शक्तिशाली और विनाशकारी दृष्टि के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति का अहित हो। ज्योतिष शास्त्र में भी इसी कारण 'शनि की दृष्टि' को भारी माना जाता है, जबकि उनके आशीर्वाद को अत्यंत कल्याणकारी।

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