Edited By Sarita Thapa,Updated: 29 Jun, 2026 01:32 PM

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपनी बातों से दूसरों के अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं और उनकी बातों में ऐसा जादू होता है कि सुनने वाला देर तक उन्हें याद रखता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शब्दों से खेलने का हुनर, गहरी सोच और कमाल...
Shayar Yog in Kundli : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपनी बातों से दूसरों के अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं और उनकी बातों में ऐसा जादू होता है कि सुनने वाला देर तक उन्हें याद रखता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शब्दों से खेलने का हुनर, गहरी सोच और कमाल की शायरी करने की कला हर किसी के पास नहीं होती। ऐसी प्रतिभा को केवल अभ्यास का परिणाम नहीं माना जाता, बल्कि जन्म कुंडली में मौजूद कुछ खास ग्रह योगों से भी जोड़ा जाता है। माना जाता है जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्रहों की जुगलबंदी होती है, तब कोई इंसान अपनी कलम और बातों से दुनिया को अपना दीवाना बना कर कवि, शायर और लेखक बन सकता है। तो आइए जानते हैं कुंडली में मौजूद खास भाव और ग्रहों के बारे में-
इन 3 ग्रहों का मजबूत होना है बेहद ज़रूरी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के मन में शायर, लेखक या कवि बनने की इच्छा होती है, तो इसके लिए मुख्य रूप बुध, शुक्र और चंद्रमा यह तीन ग्रह जिम्मेदार होते हैं। जिन लोगों की कुंडली में बुध की स्थिति ठीक होती है, वो अपने शब्दों का चयन करने माहिर होते हैं और एक अच्छा शायर बनने के लिए रोमांटिक सोच और कलात्मक नजरिया जरूरी है, जो शुक्र से ही मिलता है। वहीं, बिना गहरी भावनाओं के कोई भी व्यक्ति कविता या गजल नहीं लिख सकता। इसलिए अच्छा कवि बनने के लिए कुंडली में चंद्रमा की स्थिति की ठीक होने बहुत जरूरी है।
कुंडली में बनने वाले प्रमुख शायर और कवि योग
कल्पनावान चंद्रमा और शुक्र की युति
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर कुंडली के किसी भाव में चंद्रमा और षुक्र एक साथ आकर बैठते हैं, तो ऐसा व्यक्ति बहुत भावुक और रोमांटिक के साथ रचनात्मक और कलात्मक सोच वाले भी होते हैं। इनकी कालपनिक सोच इतनी कमाल की होती है कि ये छोटी सी बात पर भी पूरी गज़ल लिख डालते हैं।
बुध और शुक्र का संबंध
यदि बुध और शुक्र की युति तीसरे या पांचवें भाव में हो, तो इसे लेखन के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। बुध शब्द देता है और शुक्र उसमें खूबसूरती भरता है। ऐसे लोग बहुत बड़े लेखक या गीतकार बनते हैं।
पंचम भाव पर शुभ ग्रहों का प्रभाव
यदि पांचवें भाव में देवगुरु बृहस्पति, बुध या शुक्र स्थित हों, या इस भाव पर इनकी दृष्टि हो, तो व्यक्ति की बुद्धि बहुत प्रखर होती है। वह अपनी लेखनी से समाज को नई दिशा देने वाला साहित्यकार बनता है।
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