Edited By Niyati Bhandari,Updated: 08 Sep, 2026 01:50 PM

Laddu Gopals Chhathi katha: जानें भगवान कृष्ण की कृपा और कृष्ण छठी व्रत का विशेष महत्व। पढ़ें वह पौराणिक कथा जहां एक गरीब ब्राह्मण ने संतान प्राप्ति के लिए पूरी श्रद्धा से व्रत रखा और गेंहू के आटे की मिठाई का भोग लगाकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
Krishna Chhati 2026: भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की भक्ति और नवजात शिशुओं के जीवन में सुख-समृद्धि का संचार करने वाले पावन पर्व 'कृष्ण छठी' की महिमा अत्यंत निराली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर की गई पूजा, व्रत और अनुष्ठान न केवल परिवार में खुशहाली लाते हैं, बल्कि अटूट विश्वास के बल पर जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को भी दूर कर देते हैं। आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी वह अलौकिक और प्रेरक पौराणिक कथा, जिसमें एक निर्धन ब्राह्मण की सच्ची पुकार और गेंहू के आटे से बनी विशेष मिठाई के दिव्य भोग ने उनकी सूनी गोद को खुशियों से भर दिया।
Krishna Chhati katha कृष्ण छठी की कथा: प्राचीन समय की बात है, एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। उनके परिवार में एक संतान होने की बड़ी कामना थी लेकिन वर्षों की प्रार्थना और तपस्या के बाद भी उनके घर में संतान का जन्म नहीं हुआ।

एक दिन ब्राह्मण ने एक ऋषि से अपनी परेशानी बताई। ऋषि ने उन्हें सलाह दी कि भगवान कृष्ण की विशेष पूजा करें और कृष्ण छठी का व्रत करें। ब्राह्मण ने ऋषि की सलाह मानी और कृष्ण छठी का व्रत किया। उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान कृष्ण की पूजा की और विशेष रूप से गेंहू के आटे से बनी मिठाई को भगवान कृष्ण को अर्पित किया।

कुछ समय बाद ब्राह्मण की पत्नी गर्भवती हुई और उन्होंने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। ब्राह्मण ने भगवान कृष्ण की कृपा और कृष्ण छठी के व्रत की महिमा को स्वीकार किया। उन्होंने पूरे गांव में यह खुशी साझा की और कृष्ण छठी का महत्व लोगों को बताया।

कहानी के अनुसार ब्राह्मण की भक्ति और कृष्ण छठी के व्रत के कारण भगवान कृष्ण ने उनके परिवार को आशीर्वाद दिया और उनकी संतान की प्राप्ति सुनिश्चित की। इस प्रकार कृष्ण छठी की पूजा से न केवल संतान सुख की प्राप्ति होती है बल्कि यह पूजा भक्ति और विश्वास की शक्ति को भी दर्शाती है।
