Edited By Sarita Thapa,Updated: 07 Sep, 2026 02:23 PM

अमरीका प्रवास के दौरान स्वामी रामतीर्थ ने कई स्थानों पर प्रवचन दिए। उनके विचार लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उन्हें सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। एक दिन उनसे मिलने एक ऐसी महिला आई, जिसे शांति और सुख की तलाश थी। वह बहुत दुखी थी क्योंकि...
Swami Ram Tirath Story : अमरीका प्रवास के दौरान स्वामी रामतीर्थ ने कई स्थानों पर प्रवचन दिए। उनके विचार लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उन्हें सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। एक दिन उनसे मिलने एक ऐसी महिला आई, जिसे शांति और सुख की तलाश थी। वह बहुत दुखी थी क्योंकि कुछ दिन पहले ही उसके बेटे की मृत्यु हो गई थी।
महिला ने स्वामी जी से कहा, ‘‘मैं बहुत दुखी हूं और किसी भी कीमत पर सुख पाना चाहती हूं।’’ इस पर स्वामी रामतीर्थ ने कहा, ‘‘प्रसन्नता और शांति पैसों से खरीदी जाने वाली वस्तुएं नहीं हैं। फिर भी, यदि तुम चाहो तो मैं तुम्हें इसका मार्ग बता सकता हूं।’’
स्वामी जी ने उस श्वेत महिला को सलाह दी कि वह किसी अनाथ अश्वेत बच्चे को गोद ले और उसे अपने बच्चे की तरह पाले, तो उसे शांति मिल सकती है। यह सुनकर वह महिला दुखी मन से बोली कि यह मुझसे हो पाना मुश्किल है। दरअसल, श्वेत महिला के लिए किसी अश्वेत बच्चे को अपनाना तत्कालीन अमरीकी समाज में काफी मुश्किल था।

स्वामी जी ने कहा, ‘‘यदि तुम ऐसा नहीं कर सकती हो, तो शांति की आशा छोड़ दो।’’
आखिरकार महिला ने सोचा कि स्वामी जी की सलाह मान ही लेती हूं। उसने एक नीग्रो बच्चे को गोद ले लिया। सचमुच में कुछ दिन बाद महिला ने महसूस किया कि स्वामी जी की राय एकदम सही थी। गोद लिए हुए नीग्रो बच्चे से उसके हृदय में ऐसी ममता उमड़ी कि वह प्रसन्न रहने लगी। कुछ दिनों बाद वही महिला उस बालक को लेकर फिर स्वामी जी के पास आई और बोली, "आपने मुझे जीवन का सबसे बड़ा पाठ सिखाया। मेरा शोक अब नया पुत्र प्राप्त होने की प्रसन्नता में बदल गया है।"

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