Edited By Niyati Bhandari,Updated: 21 Sep, 2026 01:20 PM

Shrimad Bhagwat Katha Jalandhar: जालंधर के एस.डी. कॉलेज रोड स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आरंभ। भक्तिवेदान्त सिद्धान्ती महाराज जी ने शुकदेव जी और वेदव्यास जी से जुड़े अद्भुत रहस्य से उठाया पर्दा। पढ़ें पूरी खबर...
Bhaktivedanta Siddhanti Maharaj: एस.डी. कॉलेज रोड स्थित ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध श्री सत्यनारायण मंदिर में 20 सितंबर से 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का पावन शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा व धूमधाम के साथ हुआ। श्री राधा माधव भागवत प्रचार समिति द्वारा आयोजित इस भव्य धार्मिक महोत्सव में प्रख्यात कथा व्यास एवं अंतर्राष्ट्रीय धर्म प्रचारक श्री भक्तिवेदान्त सिद्धान्ती महाराज जी ने अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृत वर्षा प्रारंभ की।
कथा के प्रथम दिन महाराज जी ने पूछा अद्भुत प्रश्न
कथा के पहले ही दिन महाराज श्री ने उपस्थित विशाल जनसमूह के समक्ष एक ऐसा गूढ़ आध्यात्मिक प्रश्न रख दिया, जिसने सभी श्रद्धालुओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। महाराज जी ने पूछा— "श्रीमद्भागवत कथा शुकदेव जी ने अपने पिता व गुरु ऋषि वेदव्यास जी को सुनाई अथवा ऋषि वेदव्यास जी ने शुकदेव जी को सुनाई?"
इस रहस्यमयी प्रश्न पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने कहा कि यह रहस्य ज्यों का त्यों बना हुआ है। इसका वास्तविक उत्तर तथा भक्ति मार्ग से जुड़े सभी संशयों का समाधान आज (21 सितंबर) की कथा में विस्तार से किया जाएगा।
भाद्रपद नवमी को हुआ था कथा का प्रथम वाचन
महाराज जी ने भागवत महापुराण के प्राकट्य दिवस का स्मरण कराते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत का प्रथम वाचन भाद्रपद मास की नवमी तिथि को हुआ था, जब शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को अमर कथा का श्रवण कराया था।
राधा रानी के प्रिय शुक और 16 वर्ष की जन्म लीला
शुकदेव गोस्वामी जी की दिव्य महिमा का गान करते हुए व्यास पीठ से बताया गया कि शुकदेव जी साक्षात श्री राधा रानी के प्रिय 'श्री शुक' (तोते) हैं, जिन्हें किशोरी जी स्वयं 'कृष्ण-कृष्ण' नाम का रटन सिखाती हैं। कथा में शुकदेव जी महाराज की उस अद्भुत जन्म लीला का भी वर्णन हुआ, जब वे माता के गर्भ से सीधे 16 वर्ष की आयु में प्रकट हुए थे।
जीविका का साधन नहीं, जीवन होना चाहिए भागवत
कथा व्यास श्री भक्तिवेदान्त सिद्धान्ती महाराज जी ने कथा श्रवण की पवित्र मर्यादाओं पर बल देते हुए कहा, "कथा सदैव निष्काम और सच्चे वैष्णव संतों से ही सुननी चाहिए। जो लोग कथा को केवल धन कमाने या जीविका चलाने का साधन बनाते हैं, उनसे कथा सुनना उस दूध के समान प्रभाव देता है जिसे सर्प ने विषैला कर दिया हो। भागवत केवल उनसे ही सुननी चाहिए जिनके लिए श्रीमद्भागवत जीविका नहीं, बल्कि स्वयं जीवन है।"
कीर्तन से भक्तों ने किए साक्षात गोलोक धाम के दर्शन
कथा के दौरान महाराज जी के शिष्यों द्वारा प्रस्तुत किए गए मधुर और भावपूर्ण संकीर्तन पर श्रद्धालु झूम उठे। संगीतमय वातावरण में ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा मंदिर प्रांगण साक्षात गोलोक धाम में परिवर्तित हो गया हो।
कथा का समय: प्रतिदिन सायं 06:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक है।
विशेष: भक्ति मार्ग से संबंधित प्रश्नों के समाधान हेतु आज की कथा में श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।