सोमवती अमावस्या 2022: जरूर करें इन मंत्रों का जप, पितृ दोष से मिलेगी राहत

Edited By Jyoti, Updated: 29 May, 2022 09:16 AM

somvati amavasya

इस वर्ष के ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि 30 मई दिन सोमवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म के

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इस वर्ष के ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि 30 मई दिन सोमवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म के शास्त्रों में तमाम अमावस्या तिथियों का महत्व बताया है। उन्हीं में से एक सोमवती अमावस्या। बता दें इस दिन पावन नदी में स्नान आदि करने का अधिक महत्व माना जाता है। तो वहीं जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होते हैं वो इस दिन अपने पितरों का तर्पण करते हैं तो वहीं इस दिन कुछ उपाय भी किए जा सकते हैं। जिनके बारे में कहा जाता है जो व्यक्ति ये उपाय करता है जीवन के समस्त कष्टों का निवारण हो जाता है। तो आइए जानते हैं इस दिन से संबंधित उपाय व मंत्र-

प्रातः पीपल के वृक्ष के पास जाकर उस पीपल के वृक्ष को एक जनेऊ देकर और एक जनेऊ भगवान विष्णु के नाम भी उसी पीपल को अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रार्थना करें। तत्पश्चात 108 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा करके मिठाई पीपल के वृक्ष को अर्पित करें।

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इसके अलावा इस दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय:" मंत्र का जितना हो सके का जप करें।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन घर के आसपास के वृक्ष पर बैठे कौओं और जलाशयों की मछलियों को (चावल और घी मिलाकर बनाए गए) लड्डू दें। ऐसा कहा जाता है इससे पितृ दोष का निवारण होता है।

सोमवती अमावस्या के दिन C को दक्षिण दिशा में जहां पितरों के तस्वीर आदि हो उसके सम्मुख कंडे की धूनी लगाकर पितरों को अर्पित करना चाहिए, इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

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अपनी क्षमता अनुसार इस दिन एक ब्राह्मण को भोजन एवं दक्षिणा व वस्त्र दान करें, इससे भी कुंडली में मौजूद पितृ दोष की समाप्ति होती है।

 धार्मिक शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या का व्रत सुहागिनों के लिए प्रमुख माना जाता है, इसलिए सुहागिनों को ये व्रत जरूर करना चाहिए। कहा जाता है इस दिन व्रत आदि करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

इसके अतिरिक्त सोमवती अमावस्या के दिन इन मंत्रों का जप करें-

"अयोध्या, मथुरा, माया, काशी कांची अवन्तिका पुरी, द्वारावती चैव सप्तैता मोक्ष दायिका"

 "गंगे च यमुने चैव सरस्वती, नर्मदा, सिंधु कावेरी जलेस्मिन सन्निधिं कुरू"

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