Bhanu Saptami 2026 : भानु सप्तमी पर सूर्य देव की उपासना से चमक उठेगा भाग्य, जानें शुभ मुहूर्त

Edited By Updated: 07 Feb, 2026 01:54 PM

bhanu saptami 2026

Bhanu Saptami 2026 : हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जिनकी पूजा से आरोग्य, तेज और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वैसे तो हर रविवार सूर्य देव को समर्पित है लेकिन जब रविवार के दिन सप्तमी तिथि का संयोग बनता है, तो इसे भानु सप्तमी...

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Bhanu Saptami 2026 : हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जिनकी पूजा से आरोग्य, तेज और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वैसे तो हर रविवार सूर्य देव को समर्पित है लेकिन जब रविवार के दिन सप्तमी तिथि का संयोग बनता है, तो इसे भानु सप्तमी कहा जाता है। साल 2026 में भानु सप्तमी का पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में भानु सप्तमी की तिथियां, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके धार्मिक महत्व के बारे में।

Bhanu Saptami 2026

भानु सप्तमी 2026 तिथि  
भानु सप्तमी 2026 तिथि 8 फरवरी 2026, रविवार

 भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, भानु सप्तमी वह दिन है जब सूर्य देव पहली बार अपने रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड में प्रकट हुए थे। इसे सूर्य जयंती के समतुल्य माना जाता है। आरोग्यं भास्करादिच्छेत्अ र्थात स्वास्थ्य की इच्छा सूर्य से करनी चाहिए। इस दिन व्रत रखने से चर्म रोग और आंखों की समस्याओं से मुक्ति मिलती है। सूर्य को पितरों का कारक माना गया है। भानु सप्तमी पर तर्पण और दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है, उनके लिए यह दिन आत्मबल बढ़ाने और सरकारी कार्यों में सफलता पाने का वरदान है।

Bhanu Saptami 2026

Bhanu Saptami Puja Vidhi भानु सप्तमी पूजा विधि

इस दिन सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही गंगाजल मिले पानी से स्नान करें। स्नान के बाद लाल रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ होता है।

तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत और लाल फूल डालें। अर्घ्य देते समय जल की धार के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें और इन मंत्रों का जाप करें ॐ घृणि सूर्याय नमः या ॐ सूर्याय नमः। 

आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
भानु सप्तमी के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना शत्रुओं पर विजय और मानसिक शांति दिलाने वाला माना जाता है। यदि समय कम हो, तो सूर्य चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।

दान-पुण्य का महत्व
इस दिन दान का फल अक्षय होता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार गेहूं, तांबा, गुड़, लाल वस्त्र और मसूर की दाल का दान जरूरतमंदों को करें।

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