Edited By Prachi Sharma,Updated: 04 Feb, 2026 12:42 PM

Shani Pradosh Vrat 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। धार्मिक दृष्टि से शनि प्रदोष का संयोग अत्यंत...
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Shani Pradosh Vrat 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। धार्मिक दृष्टि से शनि प्रदोष का संयोग अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ न्याय के देवता शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में भक्तों के लिए यह व्रत विशेष है। आइए विस्तार से जानते हैं साल 2026 के पहले शनि प्रदोष व्रत की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में।
साल 2026 का पहला शनि प्रदोष व्रत:
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 का पहला शनि प्रदोष व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा।

तिथि: 14 फरवरी 2026, शनिवार
त्रयोदशी तिथि का आरंभ: 14 फरवरी 2026 को शाम 04:01 बजे से
त्रयोदशी तिथि का समापन: 15 फरवरी 2026 को शाम 05:04 बजे तक
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 06:10 बजे से रात 08:44 बजे तक

शनि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं। यह व्रत उन लोगों के लिए रामबाण माना गया है जो शनि की साढेसाती, ढैय्या या महादशा से गुजर रहे हैं। इस दिन शिव आराधना से शनिदेव शांत होते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से शनि प्रदोष व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और संतान के जीवन के कष्ट दूर होते हैं। शनिदेव को शिवजी का शिष्य माना जाता है। इस दिन दोनों की संयुक्त पूजा से भक्तों के सभी रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं।
Shani Pradosh Vrat Pooja Vidhi पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। पूरे दिन निराहार रहें या फलाहार ग्रहण करें।
शाम को सूर्यास्त से थोड़ा पहले पुनः स्नान करें। शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल, गाय के कच्चे दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
महादेव को बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल, भांग और सफेद चंदन अर्पित करें। भगवान शिव के साथ माता पार्वती और गणेश जी की भी पूजा करें।
