Yashoda Jayanti 2026 : यशोदा जयंती पर पढ़ें ये व्रत कथा, बच्चों के भविष्य में आएगी खुशहाली

Edited By Updated: 07 Feb, 2026 10:32 AM

yashoda jayanti 2026

Yashoda Jayanti 2026: सनातन परंपरा में यशोदा जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माता यशोदा का जन्म हुआ था इसलिए इसे उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता...

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Yashoda Jayanti 2026: सनातन परंपरा में यशोदा जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माता यशोदा का जन्म हुआ था इसलिए इसे उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। माता यशोदा ने बाल स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण का स्नेह, ममता और प्रेम से पालन-पोषण किया था। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से माता यशोदा और बाल गोपाल की पूजा करते हैं तथा व्रत रखते हैं। पूजा के समय व्रत कथा का पाठ करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

Yashoda Jayanti 2026

Yashoda Jayanti Vrat Katha यशोदा जयंती की व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रज क्षेत्र में गोपाल सुमुख नामक एक धर्मनिष्ठ व्यक्ति अपनी पत्नी पाटला के साथ रहते थे। भगवान ब्रह्मा की कृपा से उनके यहां एक कन्या का जन्म हुआ, जो आगे चलकर माता यशोदा के नाम से प्रसिद्ध हुईं। यौवन अवस्था में माता यशोदा का विवाह ब्रज के राजा नंद से हुआ। विवाह के बाद उन्होंने संतान प्राप्ति की कामना से भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति और साधना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं उनके सामने प्रकट हुए।

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भगवान विष्णु ने यशोदा से वरदान मांगने को कहा। तब माता यशोदा ने विनम्रता से प्रार्थना की कि यदि आप मुझे अपने पुत्र के रूप में प्राप्त हों, तभी मेरा तप सफल माना जाए। उनकी यह भावना सुनकर भगवान विष्णु मुस्कराए और बोले कि द्वापर युग में उनकी यह इच्छा अवश्य पूरी होगी। उन्होंने कहा कि वह देवकी और वासुदेव के यहां जन्म लेंगे, लेकिन उनका पालन-पोषण माता यशोदा ही करेंगी। समय बीतता गया और भगवान विष्णु ने अपने वचन के अनुसार श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। उनका जन्म मथुरा में देवकी और वासुदेव के घर हुआ। कंस के अत्याचारों से बालकृष्ण की रक्षा के लिए वासुदेव उन्हें गोकुल में नंद और यशोदा के पास छोड़ आए।

इसके बाद माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को अपने पुत्र की तरह प्रेमपूर्वक पाला। श्रीमद्भागवत में वर्णन मिलता है कि माता यशोदा को जो वात्सल्य और कृपा प्राप्त हुई, वह देवताओं, महादेव और यहां तक कि माता लक्ष्मी को भी दुर्लभ है। माता यशोदा का प्रेम और समर्पण आज भी मातृत्व की सबसे सुंदर मिसाल माना जाता है।

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