Edited By Niyati Bhandari,Updated: 02 Jul, 2026 10:55 AM

यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रवादी शिवसेना जयभगवान गोयल ने पंजाब सरकार द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के विरुद्ध बनाए गए कठोर कानून का स्वागत करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था और...
नई दिल्ली (नवोदय टाइम्स): यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रवादी शिवसेना जयभगवान गोयल ने पंजाब सरकार द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के विरुद्ध बनाए गए कठोर कानून का स्वागत करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था और पवित्र प्रतीकों का सम्मान प्रत्येक सभ्य समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी को गंभीर अपराध मानते हुए दोषियों के लिए आजीवन कारावास अथवा मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है, उसी प्रकार सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथों, मंदिरों, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं तथा अन्य धार्मिक प्रतीकों का अपमान, खंडन या विघटन करने वालों के विरुद्ध भी समान रूप से कठोर दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए।
गोयल ने पंजाब के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह मांग की है। गोयल ने कहा कि कानून सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए।
यदि किसी धर्म के पवित्र ग्रंथ, आराध्य और धार्मिक स्थल कानून के माध्यम से विशेष संरक्षण प्राप्त कर सकते हैं, तो सनातन धर्म के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र भी समान संवैधानिक और कानूनी संरक्षण के अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर मंदिरों में तोड़फोड़, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को खंडित करने तथा सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथों के अपमान की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसी घटनाएं केवल धार्मिक भावनाओं को ही नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए इन अपराधों को सामान्य आपराधिक घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि समाज में वैमनस्य और अशांति फैलाने वाले गंभीर अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए।
भारत का संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने और उसकी रक्षा का समान अधिकार देता है। इसलिए राज्य सरकारों का भी दायित्व है कि वे सभी धर्मों की आस्था का समान सम्मान सुनिश्चित करें तथा किसी भी धर्म के पवित्र ग्रंथ, धार्मिक स्थल अथवा आराध्य के अपमान पर समान रूप से कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करें।