अगर आप भी करना चाहते हैं सूर्य ग्रह को शांत तो जरूर करें ये 5 काम

Edited By Updated: 22 Sep, 2019 04:05 PM

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर कुंडली के ग्रह खराब हो तो व्यक्ति के जीवन में बहुत सी परेशानियां आती हैं।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर कुंडली के ग्रह खराब हो तो व्यक्ति के जीवन में बहुत सी परेशानियां आती हैं। जिसका सामना कर पाना कई बार कठिन हो जाता है। ऐसे में कई लोगों को की कुंडली में सूर्य अशांत होता है यानि सूर्य दोष होता है, जिसको शांत करने के लिे व्यक्ति कई तरह के उपाय भी करता है। मान्यता है कि सूर्य की शांति के लिए प्रात: स्नान करने के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान, जप, होम मंत्र धारण व सूर्य की वस्तुओं से जल स्नान करना भी सूर्य के उपायों में आता है। चलिए आगे जानते हैं इससे जुड़े कुछ उपायों के बारे में-
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स्नान करना
कहते हैं कि व्यक्ति को स्नान करते समय पानी में खसखस या लाल रंग का फूल मिलाकर नहाने से अनिष्टों से बचा जा सकता है। सूर्य के उपाय करने पर उसके पिता के स्वास्‍थ्य में सुधार की संभावनाओं को सहयोग प्राप्त होता है। सूर्य की वस्तुओं से स्नान करने पर सूर्य की वस्तुओं के गुण व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करते हैं तथा उसके शरीर में सूर्य के गुणों में वृद्धि करते हैं।

दान करना
सूर्य की दान देने वाली वस्तुओं में तांबा, गुड़, गेहूं, मसूर दाल दान की जा सकती है। यह दान प्रत्येक रविवार या सूर्य संक्रांति के दिन किया जा सकता है। सूर्य ग्रहण के दिन भी सूर्य की वस्तुओं का दान करना लाभकारी रहता है। दान करते समय व्यक्ति में सूर्य भगवान पर पूरी श्रद्धा व विश्वास होना चाहिए। आस्था में कमी होने पर किसी भी उपाय के पूर्ण शुभ फल प्राप्त नहीं होते हैं।
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मंत्र जाप करना
कहते हैं कि सूर्य मंत्र से भी इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। 'ॐ घूणि: सूर्य आदित्य: मंत्र' का जाप प्रतिदिन भी किया जाए या प्रत्येक रविवार के दिन यह जाप किया जाए तो ये शुभ फल देता है। प्रतिदिन जाप करने पर मंत्रों की संख्या 10, 20 या 108 हो सकती है। मंत्रों की संख्या को बढ़ाया भी जा सकता है तथा सूर्य से संबंधित अन्य कार्य जैसे हवन इत्यादि में भी इसी मंत्र का जाप करना अनुकूल रहता है।

सूर्य यंत्र की स्‍थापना
सूर्य यंत्र की स्‍थापना करने के लिए सबसे पहले तांबे के पत्र या भोजपत्र पर विशेष परिस्थितियों में कागज पर ही सूर्य यंत्र का निर्माण कराया जाता है। तांबे के पत्र पर खाने बनवाकर इनमें संख्याएं लिखवा लेनी चाहिए या फिर भोजपत्र या कागज पर लाल चंदन, केसर, कस्तूरी से इन्हें स्वयं ही बना लेना चाहिए। अनार की कलम से इस यंत्र के खाने बनाना उत्तम होता है। सभी ग्रहों के यंत्र बनाने के लिए इन वस्तुओं व पदार्थों से लेखन किया जा सकता है। 
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सूर्य हवन करवाना
उपरोक्त जो सूर्य का मंत्र दिया गया है उसी मंत्र को हवन में प्रयोग किया जा सकता है। हवन करने के लिए किसी जानकार पंडित की सहायता ली जा सकती है। सूर्य कुंडली में आरोग्य शक्ति व पिता के कारक ग्रह होते हैं। जब जन्म कुंडली में सूर्य के दुष्प्रभाव प्राप्त हो रहे हों या फिर सूर्य राहु-केतु से पीड़ित हों तो सूर्य से संबंधित उपाय करना लाभकारी रहता है। 

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