Mesh Sankranti 2026: 14 अप्रैल को सूर्य का मेष राशि में प्रवेश, जानें महापुण्य काल का समय और बैसाखी पर पूजा की संपूर्ण विधि

Edited By Updated: 13 Apr, 2026 11:56 AM

vaisakhi 2026

Mesh Sankranti 2026: जानें 2026 में मेष संक्रांति और बैसाखी कब है। सूर्य देव की पूजा का महापुण्य काल, स्नान-दान का महत्व और मेष संक्रांति की संपूर्ण पूजा विधि यहां पढ़ें।

Vaisakhi 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 में मेष संक्रांति का पर्व 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि ग्रहों के राजा सूर्य देव मीन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं। इस संक्रांति को देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, विशेषकर पंजाब में इसे बैसाखी के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

Mesh Sankranti 2025: इस दिन होगा खरमास का समापन, जल्द ही शुरू होगा शुभ  कामों का दौर - mesh sankranti 2025-mobile

मेष संक्रांति 2026: शुभ मुहूर्त और समय
मेष संक्रांति पर स्नान और दान का विशेष फल मिलता है। इस वर्ष के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
संक्रांति तिथि: 14 अप्रैल 2026
पुण्य काल: सुबह 05:57 से दोपहर 01:55 तक
महा पुण्य काल: सुबह 07:30 से 11:47 तक (यह समय दान और पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है)
संक्रांति का क्षण: सुबह 09:39 बजे

Vaisakhi 2026

एक पर्व, अनेक नाम: पूरे भारत में उत्सव
मेष संक्रांति राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। जहां पंजाब में इसे बैसाखी कहते हैं, वहीं ओडिशा में यह पणा संक्रांति, तमिलनाडु में पुथन्डु, केरल में विषु, बंगाल में पोहेला बोइशाख और असम में बिहू के नाम से मनाई जाती है। उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में इसे सतुआन या सतुआ संक्रांति भी कहा जाता है।

Vaisakhi 2026

सूर्य देव को प्रसन्न करने की अचूक पूजा विधि
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है:

पवित्र स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो गंगा स्नान करें, अन्यथा जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल फूल, अक्षत (चावल) और कुमकुम मिलाएं। 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें।

आदित्य हृदय स्तोत्र: इस दिन इस स्तोत्र का पाठ करना करियर और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है

देव आराधना: सूर्य देव के साथ-साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा भी अवश्य करें।

दीप दान: शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं।

दान का विशेष महत्व
इस दिन पितरों का तर्पण करना और जरूरतमंदों को अन्न व वस्त्र का दान करना मोक्ष प्रदायक माना गया है।

Vaisakhi 2026

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!