Varalakshmi Vrat 2026 Date : किस दिन रखा जाएगा वरलक्ष्मी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Edited By Updated: 21 Aug, 2026 08:32 AM

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सावन और भाद्रपद के महीनों में पड़ने वाले प्रमुख व्रतों में से वरलक्ष्मी व्रत का बहुत खास स्थान है। यह व्रत प्रमुख रूप से दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, लेकिन अब यह उत्तर भारत के साथ-साथ पूरे देश में मनाया जाने लगा है।

Varalakshmi Vrat 2026 Date : सावन और भाद्रपद के महीनों में पड़ने वाले प्रमुख व्रतों में से वरलक्ष्मी व्रत का बहुत खास स्थान है। यह व्रत प्रमुख रूप से दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, लेकिन अब यह उत्तर भारत के साथ-साथ पूरे देश में मनाया जाने लगा है। यह दिन माता लक्ष्मी को समर्पित है। माना जाता है कि  इस दिन सच्चे मन से वरलक्ष्मी की पूजा करने और व्रत रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वरलक्ष्मी व्रत के दिन देवी लक्ष्मी का पूजन स्थिर लग्न में  किया जाता है। तो आइए जानते हैं वरलक्ष्मी व्रत के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-

वरलक्ष्मी शुभ मुहूर्त 2026

सिंह लग्न पूजा मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 33 मिनट रहेगी।

वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से  दोपहर 2 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 2 घंटे 20 मिनट रहेगी।

कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त शाम 6 बजकर 14 मिनट से शाम 7 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसकी अवधि 1 घंटा 25 मिनट रहेगी।

आखिर में वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त रात 10 बजकर 35 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 1 घंटा 55 मिनट रहेगी।

वरलक्ष्मी पूजा विधि 

वरलक्ष्मी व्रत के दिन पूजा की शुरुआत सुबह से ही शुद्धता और श्रद्धा के साथ की जाती है। सबसे पहले सूर्योदय से पहले या सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 

इसके बाद पूजा वाले स्थान की अच्छी तरह सफाई करके गंगाजल का छिड़काव करें। मन में मां वरलक्ष्मी का स्मरण करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें।

अब पूजा की तैयारी के लिए एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। यदि घर में प्रतिमा उपलब्ध न हो तो देवी-देवताओं की तस्वीर के सामने भी पूजा की जा सकती है। 

इसके बाद चावल की एक छोटी सी ढेरी बनाकर उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें और कलश को पूजा की सामग्री से सजाएं। सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। उन्हें दूर्वा, चंदन, हल्दी-कुमकुम, फूल और नारियल आदि अर्पित करें। 

इसके बाद मां वरलक्ष्मी का विधिवत श्रृंगार करें और उन्हें सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। देवी को अपनी श्रद्धा के अनुसार फल, मिठाई और अन्य भोग चढ़ाएं।

इसके बाद धूप और घी का दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का ध्यान और पूजन करें। पूजा के बाद वरलक्ष्मी व्रत की कथा का श्रवण या पाठ करें और अंत में मां की आरती करें। दोनों हाथ जोड़कर परिवार की सुख-समृद्धि और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए मां से क्षमा मांगकर विधि को पूर्ण करें।

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