Edited By Sarita Thapa,Updated: 14 Oct, 2026 01:21 PM

सनातन धर्म में शदर पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व मां लक्ष्मी और चंद्र देव की आराधना के लिए खास है। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से...
Sharad Purnima 2026 : सनातन धर्म में शदर पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व मां लक्ष्मी और चंद्र देव की आराधना के लिए खास है। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है उसकी चांदनी को अमृत के समान माना जाता है। इस दिन कई घरों में खीर बनाकर रात में चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है और अगले दिन इसे प्रसाद के ग्रहण किया जाता है। अगर आप भी शरद पूर्णिमा का व्रत रखने और मां लक्ष्मी की पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं साल 2026 में शदर पूर्णिमा कब मनाई जाएगी, पूजा का शुभ मुहूर्त इस दिन का धार्मिक महत्व क्या है।
कब है शरद पूर्णिमा 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। इसे मिथिलांचल में चुमाओन कहा जाता है।

शरद पूर्णिमा 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
शरद पूर्णिमा की रात पूजा के लिए निशिता काल का विशेष महत्व है। 25 अक्टूबर को निशिता काल रात 11 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 26 अक्टूबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
शरद पूर्णिमा को कई स्थानों पर कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कौमुदी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने की परंपराएं भिन्न हो सकती हैं। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा करती हैं। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने और उनकी उपासना करने की परंपरा है। ब्रज क्षेत्र में शरद पूर्णिमा को भगवान श्रीकृष्ण के महारास से जोड़कर देखा जाता है। भक्त परिवार की खुशहाली, शांति और आर्थिक उन्नति के लिए पूजा-पाठ करते हैं।

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