Edited By Prachi Sharma,Updated: 21 Mar, 2026 12:39 PM

Vasudeva Chaturthi 2026 : वासुदेव चतुर्थी भगवान श्रीकृष्ण और विघ्नहर्ता गणेश की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत पावन अवसर है। 2026 में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि ग्रहों की चाल कुछ ऐसी बन रही है जो साधकों के लिए भाग्य के द्वार खोल सकती है।
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Vasudeva Chaturthi 2026 : वासुदेव चतुर्थी भगवान श्रीकृष्ण और विघ्नहर्ता गणेश की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत पावन अवसर है। 2026 में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि ग्रहों की चाल कुछ ऐसी बन रही है जो साधकों के लिए भाग्य के द्वार खोल सकती है।
वासुदेव चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक पूजन करने से जन्म-जन्मान्तर के पाप नष्ट हो जाते हैं। इसे संकष्टी चतुर्थी के समकक्ष ही फलदायी माना गया है लेकिन वासुदेव नाम जुड़ा होने के कारण यह संतान प्राप्ति, पारिवारिक सुख और आर्थिक समृद्धि के लिए विशेष फलदायी हो जाती है।
"वासुदेव सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः" - यानी जो सब कुछ वासुदेव ही है, ऐसा मानता है, वह महात्मा दुर्लभ है। इस दिन की साधना इसी भाव को जाग्रत करती है।
Bhagwan Ganesh ke 108 Naam भगवान गणेश के 108 नाम
ॐ गजाननाय नमः।
ॐ गणाध्यक्षाय नमः।
ॐ विघ्नराजाय नमः।
ॐ विनायकाय नमः।
ॐ द्वैमातुराय नमः।
ॐ द्विमुखाय नमः।
ॐ प्रमुखाय नमः।
ॐ सुमुखाय नमः।
ॐ कृतिने नमः।
ॐ सुप्रदीपाय नमः।
ॐ सुखनिधये नमः।
ॐ सुराध्यक्षाय नमः।
ॐ सुरारिघ्नाय नमः।
ॐ महागणपतये नमः।
ॐ मान्याय नमः।
ॐ महाकालाय नमः।
ॐ महाबलाय नमः।
ॐ हेरम्बाय नमः।
ॐ लम्बजठरायै नमः।
ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः।
ॐ महोदराय नमः।
ॐ मदोत्कटाय नमः।
ॐ महावीराय नमः।
ॐ मन्त्रिणे नमः।
ॐ मङ्गल स्वराय नमः।
ॐ प्रमधाय नमः।
ॐ प्रथमाय नमः।
ॐ प्राज्ञाय नमः।
ॐ विघ्नकर्त्रे नमः।
ॐ विघ्नहर्त्रे नमः।
ॐ विश्वनेत्रे नमः।
ॐ विराट्पतये नमः।
ॐ श्रीपतये नमः।
ॐ वाक्पतये नमः।
ॐ शृङ्गारिणे नमः।
ॐ अश्रितवत्सलाय नमः।
ॐ शिवप्रियाय नमः।
ॐ शीघ्रकारिणे नमः।
ॐ शाश्वताय नमः।
ॐ बल नमः।
ॐ बलोत्थिताय नमः।
ॐ भवात्मजाय नमः।
ॐ पुराण पुरुषाय नमः।
ॐ पूष्णे नमः।
ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः।
ॐ अग्रगण्याय नमः।
ॐ अग्रपूज्याय नमः।
ॐ अग्रगामिने नमः।
ॐ मन्त्रकृते नमः।
ॐ चामीकरप्रभाय नमः।
ॐ सर्वाय नमः।
ॐ सर्वोपास्याय नमः।
ॐ सर्व कर्त्रे नमः।
ॐ सर्वनेत्रे नमः।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः।
ॐ सिद्धये नमः।
ॐ पञ्चहस्ताय नमः।
ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः।
ॐ प्रभवे नमः।
ॐ कुमारगुरवे नमः।
ॐ अक्षोभ्याय नमः।
ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः।
ॐ प्रमोदाय नमः।
ॐ मोदकप्रियाय नमः।
ॐ कान्तिमते नमः।
ॐ धृतिमते नमः।
ॐ कामिने नमः।
ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः।
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।
ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः।
ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः।
ॐ जिष्णवे नमः।
ॐ विष्णुप्रियाय नमः।
ॐ भक्त जीविताय नमः।
ॐ जितमन्मधाय नमः।
ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः।
ॐ ज्यायसे नमः।
ॐ यक्षकिन्नेर सेविताय नमः।
ॐ गङ्गा सुताय नमः।
ॐ गणाधीशाय नमः।
ॐ गम्भीर निनदाय नमः।
ॐ वटवे नमः।
ॐ अभीष्टवरदाय नमः।
ॐ ज्योतिषे नमः।
ॐ भक्तनिधये नमः।
ॐ भावगम्याय नमः।
ॐ मङ्गलप्रदाय नमः।
ॐ अव्यक्ताय नमः।
ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः।
ॐ सत्यधर्मिणे नमः।
ॐ सखये नमः।
ॐ सरसाम्बुनिधये नमः।
ॐ महेशाय नमः।
ॐ दिव्याङ्गाय नमः।
ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः।
ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः।
ॐ सहिष्णवे नमः।
ॐ सततोत्थिताय नमः।
ॐ विघातकारिणे नमः।
ॐ विश्वग्दृशे नमः।
ॐ विश्वरक्षाकृते नमः।
ॐ कल्याणगुरवे नमः।
ॐ उन्मत्तवेषाय नमः।
ॐ अपराजिते नमः।
ॐ समस्त जगदाधाराय नमः।
ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः।
ॐ आक्रान्त चिद चित्प्रभवे नमः।
ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः।
घर पर कैसे करें पूजा ?
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
स्थापना: एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान श्रीकृष्ण एवं गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
पंचामृत अभिषेक: मूर्तियों को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण (पंचामृत) से स्नान कराएं।
भोग: भगवान को माखन-मिश्री, पीले फल और मोदक का भोग लगाएं। याद रखें, विष्णु जी की पूजा में तुलसी दल अनिवार्य है।
दीपदान: संध्या के समय घर के मुख्य द्वार पर और मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं।