Edited By Sarita Thapa,Updated: 30 May, 2026 04:25 PM

सनातन धर्म में देवों के देव महादेव के के पुत्र गणेश जी को प्रथम पूजनीय देव कहा जाता है। किसी भी मांगलिक या शुभ काम की शुरुआत करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।
Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 Date : सनातन धर्म में देवों के देव महादेव के के पुत्र गणेश जी को प्रथम पूजनीय देव कहा जाता है। किसी भी मांगलिक या शुभ काम की शुरुआत करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणपति बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विभुवन संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में आने वाले सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं अधिक मास की विभुवन संकष्टी चतुर्थी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-
विभुवन सकष्टी चतुर्थी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 03 जून को रात 09 बजकर 21 मिनट पर होगी और इस तिथि का समापन 04 जून को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में विभुवन संकष्टी चतुर्थी 03 जून को मनाई जाएगी।संकष्टी के दिन चन्द्रोदय 03 जून को रात 10 बजकर 04 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।

विभुवन सकष्टी चतुर्थी 2026 पूजा विधि
विभुवन सकष्टी चतुर्थी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
फिर घर के मंदिर की सफाई करने के बाद गंगाजल का छिड़काव करें और व्रत का संकल्प लें।
उसके बाद एक चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
अब गणेश जी को अक्षत, हल्दी, फूल, धूप, दीप, गंध, नैवेद्य, पान, सुपारी और फल अर्पित करें।
इसके बाद भगवान गणेश को सिंदूर और दूर्वा अर्पित करें और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
फिर गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करें और उनके नामों और मंत्रों का जाप करें।
अंत में बप्पा के समक्ष घी का दीपक जलाएं और आरती करें।

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