Edited By Prachi Sharma,Updated: 05 Mar, 2026 01:16 PM

Vikram Samvat 2083 : हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए इस तिथि से नए साल का आरंभ होता है। हिंदू नववर्ष के पहले दिन...
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Vikram Samvat 2083 : हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए इस तिथि से नए साल का आरंभ होता है। हिंदू नववर्ष के पहले दिन ही यह भी निर्धारित किया जाता है कि उस वर्ष का राजा और मंत्री कौन होंगे, और उसी आधार पर पूरे साल की स्थिति और संभावित घटनाओं के बारे में ज्योतिषीय अनुमान लगाए जाते हैं।
कब से शुरू होगा हिंदू नववर्ष ?
इस वर्ष हिंदू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च से होगी। यह दिन गुरुवार को पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस वार से नववर्ष आरंभ होता है, उसी ग्रह को उस वर्ष का राजा माना जाता है। इसलिए गुरुवार होने के कारण इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति (गुरु ग्रह) होंगे। वहीं इस साल के मंत्री मंगल ग्रह माने जाएंगे।
विक्रम संवत 2083 का नाम रौद्र संवत बताया गया है। ज्योतिषीय दृष्टि से माना जाता है कि इस नाम के संवत में कई प्रकार की चुनौतियां और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
रौद्र संवत 2083 का संभावित प्रभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस संवत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है। कई देशों के नेताओं के बीच मतभेद और टकराव की स्थिति बनने की संभावना जताई जाती है। कुछ स्थानों पर संघर्ष या युद्ध जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा आगजनी, दुर्घटनाओं या प्राकृतिक चुनौतियों की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। मौसम के लिहाज से बारिश सामान्य से कम होने की संभावना जताई जाती है, जिसका असर खेती और फसलों की कीमतों पर पड़ सकता है।
कुछ देशों में जनता और सरकार के बीच असंतोष भी देखने को मिल सकता है और विरोध-प्रदर्शन की स्थितियां बन सकती हैं। कुल मिलाकर ज्योतिषीय दृष्टि से रौद्र संवत 2083 को चुनौतियों और उतार-चढ़ाव से भरा वर्ष माना जा रहा है।