Chaitra Navratri 2026 : पालकी पर होगा मां दुर्गा का आगमन ! हाथी पर विदाई, किस राशि पर बरसेगी विशेष कृपा ?

Edited By Updated: 21 Feb, 2026 03:20 PM

chaitra navratri 2026

Chaitra Navratri 2026 : नवरात्रि हिंदू परंपरा में शक्ति उपासना का अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और उपवास रखकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। वर्ष 2026 में चैत्र...

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Chaitra Navratri 2026 : नवरात्रि हिंदू परंपरा में शक्ति उपासना का अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और उपवास रखकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से आरंभ होकर 27 मार्च तक चलेगी। चूंकि यह पर्व वसंत ऋतु में आता है इसलिए इसे वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है।

इन दिनों माता के आगमन और प्रस्थान की सवारी का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी किस वाहन पर पृथ्वी पर आती हैं और किस वाहन से विदा लेती हैं, यह उस दिन पर निर्भर करता है जिस दिन नवरात्रि का आरंभ और समापन होता है। इसे आने वाले समय के शुभ-अशुभ संकेतों से भी जोड़ा जाता है।

Chaitra Navratri 2026

देवी पुराण में उल्लेख मिलता है कि यदि नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार या शुक्रवार से हो, तो माना जाता है कि माता डोली (पालकी) पर सवार होकर आती हैं। डोली को सामान्यतः स्थिरता की कमी और चुनौतियों का प्रतीक माना जाता है। ऐसी स्थिति को देश और समाज के लिए कुछ कठिन परिस्थितियों, आर्थिक उतार-चढ़ाव या प्राकृतिक असंतुलन के संकेत के रूप में देखा जाता है।

साल 2026 में नवरात्रि का प्रारंभ गुरुवार, 19 मार्च को हो रहा है, इसलिए मान्यता है कि इस बार माता का आगमन डोली पर होगा। हालांकि, माता के प्रस्थान को अत्यंत शुभ माना गया है। 27 मार्च 2026, जो शुक्रवार है, उस दिन नवरात्रि का समापन होगा। परंपराओं के अनुसार शुक्रवार को माता हाथी पर सवार होकर विदा होती हैं। हाथी को समृद्धि, शांति, उत्तम वर्षा और कृषि उन्नति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए माता का हाथी पर प्रस्थान सकारात्मक संकेत देता है।

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चैत्र नवरात्रि का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी विशेष है। मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ था और ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी। यही कारण है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है। साथ ही, भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म भी इसी पावन अवधि में हुआ था।

इस प्रकार चैत्र नवरात्रि केवल उपासना का पर्व ही नहीं, बल्कि नई ऊर्जा, नवसृजन और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक भी है।

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