Kundli Tv- भगवान श्री नाथ के पूजा की क्या है सही विधि ?

Edited By Updated: 14 Nov, 2018 10:10 AM

what is the correct method of worship of sri nath

बुधवार दिनांक 14.11.18 को कार्तिक शुक्ल सप्तमी है जिसके स्वामी नारायण हैं। इस दिन आंवले का दान व उपयोग मना है। आज श्रवण नक्षत्र है जिसके स्वामी चंद्रमा है। इसमें भगवान विष्णु के पूजन का विधान है।

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बुधवार दिनांक 14.11.18 को कार्तिक शुक्ल सप्तमी है जिसके स्वामी नारायण हैं। इस दिन आंवले का दान व उपयोग मना है। आज श्रवण नक्षत्र है जिसके स्वामी चंद्रमा है। इसमें भगवान विष्णु के पूजन का विधान है। ऐसे योग में श्रीकृष्ण के श्रीनाथ स्वरूप का पूजन भी श्रेष्ठ रहेगा। शास्त्रों में श्रीनाथजी का स्वरूप कृष्ण की 7 वर्ष की आयु का चित्रण है। श्रीकृष्ण भक्ति के पुष्टि मार्ग में श्रीनाथजी की आराधना करते हैं जिसमें उन्होंने बाएं हाथ से गोवर्धन उठाया है व दायां हाथ कमर पर है। श्रीनाथजी का बायां हाथ सन 1410 में गोवर्धन पर्वत पर प्रकट हुआ था व सन 1479 में श्रीवल्लभाचार्यजी के जन्म के साथ ही श्रीनाथजी के कमलमुख का प्राकट्य हुआ। मान्यतानुसार सन 1493 में श्रीवल्लभाचार्य को अर्धरात्रि में श्रीनाथजी की मूर्ति के सबसे पहले दर्शन हुए थे। अतः श्रीनाथ जी कलियुग के कृष्ण माने गए हैं। कलयुगी संसार में पूजन के लिए भी धन चाहिए। यहां तक की स्वयं धनलक्ष्मी के पूजन के लिए भी धन ज़रूरी है। इसी कारण स्वयं श्रीकृष्ण ने संसार को धन की महत्वता समझाई है। कृष्ण का एक नाम श्रीनाथ है अर्थात धन के नाथ। श्रीनाथ स्वरूप में इनकी शक्ति यमराज की बहन यमुना मानी जाती है। श्रीनाथ के विशेष पूजन व उपाय से जीवन से पैसे की तंगी दूर होती है, व्यक्ति को गरीबी से मुक्ति मिलती है तथा जीवन धन-धान्य से परिपूर्ण होता हैं।
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स्पेशल पूजन विधि: घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में हरा कपड़ा बिछाकर उसपर यमुना जी, श्रीनाथजी और लक्ष्मी जी का चित्र स्थापित करें और उसके पास 2 नारियल सुदर्शनचक्र व वल्लभचार्य का स्वरूप स्थापित करके उनका विधिवत षोडशोपचार पूजन करें। कांसे के दीए में साबुत धनिया के कुछ दाने डालकर गाय के घी का दीपक करें, मोगरे की अगरबत्ती करें, यमुना पर काजल, श्रीनाथजी पर गोलोचन व लक्ष्मी जी पर लाल चंदन से तिलक करें। लाल, पीले व सफ़ेद फूल चढ़ाएं, गुड़-घी आटे से बने रोट का भोग लगाएं। तुलसी अर्पित करें तथा इन विशेष मंत्रों का 1-1 माला जाप करें। पूजन के बाद रोट का प्रसाद किसी सुहागन को दान दें।
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पूजन मुहूर्त: शाम 19:00 से रात 20:00 तक।

यमुना जी पूजन मंत्र: ॐ यमुनायै नमः॥

श्रीनाथ जी पूजन मंत्र: ॐ श्रीं मधुरा-नाथाय नमः॥

लक्ष्मी जी पूजन मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कामवरदायै नमः॥

सुदर्शन पूजन मंत्र: ॐ श्रीचक्राय नमः॥

श्रीवल्लभाचार्य पूजन मंत्र: श्रीवल्लभाय नमः।
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स्पेशल टोटके: 
धन वृद्धि के लिए:
श्रीनाथ जी पर चढ़ी रोली से तिजोरी पर "श्रीँ" लिखें।

सांसारिक समृद्धि के लिए: श्रीनाथजी पर चढ़ा सूजी का हलवे लाल गाय को खिलाएं। 

आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए: तांबे के बर्तन में गेहूं भरकर श्रीराधाकृष्ण मंदिर चढ़ाएं।

गुडलक के लिए: केसरी रंग कपड़े पहनकर श्रीनाथजी का पूजन करें।
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विवाद टालने के लिए: तुलसी की माला से "ॐ क्लीं नमः" मंत्र का जाप करें। 

नुकसान से बचने के लिए: घर या ऑफिस की उत्तर दिशा में गाय का घी का 7 मुखी दीपक करें।

प्रोफेशनल सक्सेस के लिए: लक्ष्मी जी पर चढ़ा तुलसी पत्र गल्ले या दराज़ में रखें।

एजुकेशन में सक्सेस के लिए: हरे पेन से नोटबुक पर "क्लीं कृष्णाय नमः" मंत्र लिखें।

फैमिली हैप्पीनेस के लिए: दंपत्ति श्रीनाथजी पर चढ़ी मिश्री गरीब कन्याओं में बाटें।
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लव लाइफ में सक्सेस के लिए: यमुना जी पर चढ़ी मेहंदी किसी कन्या को भेंट करें।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

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