मां बनने की प्लानिंग पर खुलकर बोलीं Aarti Singh- नेचुरल प्रेग्नेंसी न हुई तो गोद लेंगे बच्चे

Edited By Updated: 07 Apr, 2026 05:47 PM

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Mumbai : बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा की भांजी और टीवी एक्ट्रेस Aarti Singh ने हाल ही में अपने जीवन के संघर्षों और निजी सफर पर खुलकर बात की है। 'हाउटरफ्लाई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी उतार-चढ़ावों से भरी रही है लेकिन इन मुश्किलों...

Mumbai : बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा की भांजी और टीवी एक्ट्रेस Aarti Singh ने हाल ही में अपने जीवन के संघर्षों और निजी सफर पर खुलकर बात की है। 'हाउटरफ्लाई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी उतार-चढ़ावों से भरी रही है लेकिन इन मुश्किलों ने उन्हें और भी मजबूत बनाया है।

बचपन का संघर्ष और मां का साया छिनना
आरती ने बताया कि उनके जन्म के महज एक महीने के भीतर ही उनकी मां का निधन हो गया था। उनकी मां केवल 37 वर्ष की थीं। मां के जाने के बाद उनके पिता का साथ भी उन्हें नहीं मिल सका। आरती का जन्म समय से पहले हुआ था, जिसके कारण शुरुआती दौर काफी चुनौतीपूर्ण रहा।

Aarti Singh

परवरिश और परिवार से दूरी
आरती के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उनके पिता ने निधन से पहले उन्हें अपनी सबसे अच्छी दोस्त (जिन्हें आरती 'गीता मां' कहती हैं) को सौंप दिया। आरती ने बताया कि वह अपने भाई कृष्णा अभिषेक के साथ बड़ी नहीं हुईं। कृष्णा को उनके पिता ने संभाला, जबकि आरती को गोद लेने वाले परिवार ने पाला। हालांकि वह अपने सगे भाई-बहन से दूर रहीं, लेकिन आरती का मानना है कि उन्हें उस परिवार में बहुत प्यार और देखभाल मिली, जिसने उन्हें बेहतर इंसान बनाया।

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शादी और बेबी प्लानिंग पर बेबाक राय
अपनी शादी और भविष्य को लेकर आरती ने बेहद आधुनिक और संवेदनशील सोच साझा की। उन्होंने बताया कि जब वह पहली बार अपने पति से मिलीं, तो उन्होंने अपनी उम्र (38-39 वर्ष) और कंसीव करने की संभावनाओं पर खुलकर बात की।

"मैंने उनसे कहा कि शायद बढ़ती उम्र के कारण मैं मां न बन पाऊं। इस पर मेरे पति का जवाब बहुत सुकून देने वाला था। उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत से बच्चे हैं जिन्हें घर की जरूरत है, हम गोद ले सकते हैं।

गोद लेने के प्रति नजरिया
आरती ने साफ किया कि अगर वह प्राकृतिक रूप से मां नहीं बन पाती हैं, तो उन्हें बच्चा गोद लेने में कोई झिझक नहीं है। उनका मानना है कि चूंकि वह खुद भी एक एडॉप्टेड चाइल्ड' रही हैं, इसलिए वह इस अहसास और जरूरत को गहराई से समझती हैं।

निष्कर्ष: आरती सिंह की कहानी यह सिखाती है कि परिवार सिर्फ खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि प्यार और सुरक्षा से बनता है। उनका संघर्ष और अब उनकी नई शुरुआत कई लोगों के लिए प्रेरणादायक है।

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