Leh Helicopter Crash: भारतीय सेना का चीता हेलीकॉप्टर क्रैश, बाल-बाल बचे तीन अधिकारी

Edited By Updated: 23 May, 2026 11:48 AM

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Leh Helicopter Crash: लद्दाख के लेह इलाके में भारतीय सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हेलीकॉप्टर में 3 डिवीज़न यानी त्रिशूल डिवीज़न के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) समेत तीन सैन्य अधिकारी मौजूद थे। राहत की बात यह रही कि हादसे में सभी...

Leh Helicopter Crash: लद्दाख के लेह इलाके में भारतीय सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हेलीकॉप्टर में 3 डिवीज़न यानी त्रिशूल डिवीज़न के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) समेत तीन सैन्य अधिकारी मौजूद थे। राहत की बात यह रही कि हादसे में सभी अधिकारी सुरक्षित बच गए और उन्हें केवल हल्की चोटें आईं। जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना लेह के दक्षिण-पूर्व में स्थित तांगत्से क्षेत्र के पास हुई। हेलीकॉप्टर को एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर रैंक के अधिकारी ऑपरेट कर रहे थे। घटना बुधवार को हुई थी, जबकि इसकी जानकारी बाद में सार्वजनिक हुई।

जांच के आदेश जारी
सेना ने हादसे की वजह जानने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (CoI) शुरू कर दी है। शुरुआती स्तर पर तकनीकी खराबी और कठिन मौसम परिस्थितियों को संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

पुराने हेलीकॉप्टरों पर फिर उठे सवाल
यह दुर्घटना सेना के पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है। कई दशकों से सेवा में मौजूद ये हेलीकॉप्टर अब उम्रदराज हो चुके हैं और कठिन पर्वतीय इलाकों में इनके संचालन को चुनौतीपूर्ण माना जाता है। भारतीय सेना आने वाले वर्षों में इन हेलीकॉप्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी कर रही है। उनकी जगह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा तैयार किए गए आधुनिक Light Utility Helicopter (LUH) शामिल किए जाएंगे।

हिमालयी मिशनों की रीढ़ रहा चीता
चीता हेलीकॉप्टर को 1971 में सेना में शामिल किया गया था। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के कारण यह लंबे समय तक सेना की सबसे भरोसेमंद मशीनों में गिना जाता रहा। इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल सैनिकों तक रसद पहुंचाने, टोही मिशन, तोपखाने की निगरानी, मेडिकल इवैक्यूएशन और आपातकालीन एयर एम्बुलेंस सेवाओं के लिए किया जाता रहा है। सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में इनकी भूमिका बेहद अहम रही है।

ऊंचाई पर ऑपरेशन बनते हैं मुश्किल
18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में उड़ान भरना किसी भी हेलीकॉप्टर के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। पतली हवा के कारण इंजन की ताकत और रोटर की लिफ्ट कम हो जाती है, जिससे हेलीकॉप्टर की क्षमता प्रभावित होती है। फिर भी सेना आज भी बाना टॉप, अशोक और सोनम जैसी दूरस्थ चौकियों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए इन हेलीकॉप्टरों पर निर्भर है। ये पोस्ट करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं।

LUH बनेगा नई ताकत

HAL द्वारा विकसित Light Utility Helicopter (LUH) को खासतौर पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें लगाया गया Shakti-1U टर्बोशाफ्ट इंजन अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम माना जाता है।

यह हेलीकॉप्टर 21,300 फीट तक उड़ान भर सकता है और दुनिया के सबसे ऊंचे हेलीपैड्स पर उतरने की क्षमता रखता है। इसकी अधिकतम गति करीब 235 किलोमीटर प्रति घंटा है।तीन टन श्रेणी का यह हेलीकॉप्टर दो क्रू सदस्यों के साथ छह सैनिकों को ले जा सकता है। इसमें आधुनिक डिजिटल ग्लास कॉकपिट, नाइट विज़न सपोर्ट और मेडिकल इवैक्यूएशन जैसी उन्नत सुविधाएं दी गई हैं।

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