Interview: जीरो के बहाने पिता पुत्र के अनकहे जज्बात दिखाएगी फिल्म 'आर्यभट्ट का जीरो'

Edited By Updated: 07 Aug, 2026 12:06 PM

aryabhatt ka zero starcast exclusive interview

आर्यभट्ट का जीरो फिल्म को लेकर कमल चंद्रा, हिमांश कोहली, सोनाली सहगल ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कमल चंद्रा के निर्देशन में बनी फिल्म 'आर्यभट्ट का जीरो' 7 अगस्त, 2026 को पूरे भारत के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में एक साधारण लड़के की असाधारण यात्रा की झलक दिखाई है जो असफलताओं, टूटे सपनों, दिल टूटने, पारिवारिक जिम्मेदारियों और लगातार सामाजिक मजाक से जूझते हुए सम्मान और आत्मसम्मान की तलाश करता है। फिल्म में हिमांश कोहली, सोनाली सहगल, रवि किशन, दर्शन बनिक, राजेश शर्मा, गोपाल दत्त, इश्लिन प्रसाद, अलका अमीन , नीरज सूद और शिल्पा शिंदे अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस फिल्म को लेकर कमल चंद्रा, हिमांश कोहली, सोनाली सहगल ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

कमल चंद्रा

प्रश्न: फिल्म में जीरो का क्या मतलब है? टाइटल के पीछे क्या कहानी है?

फिल्म में नीरज सूद जी के किरदार का नाम आर्यभट्ट श्रीवास्तव है और उनके बेटे का नाम ब्रह्मगुप्त श्रीवास्तव (बग्गू) है। आर्यभट्ट ने शून्य (जीरो) की खोज की थी, इसलिए मोहल्ले वाले मजाक में कहते हैं कि एक आर्यभट्ट ने जीरो बनाया था और इन आर्यभट्ट ने घर में एक "जीरो" पैदा कर दिया। यही घर का जीरो फिल्म का सबसे बड़ा सस्पेंस है, जो कहानी के साथ सामने आता है।

प्रश्न: क्या आपको लगता है कि भारतीय परिवारों में पिता और बेटे के बीच भावनाएं व्यक्त करने में झिझक होती है?

बिल्कुल। भारतीय परिवारों में पिता और बेटा एक-दूसरे की बहुत परवाह करते हैं, लेकिन सामने आकर अपने प्यार का इज़हार कम करते हैं। कई बार उनके विचार नहीं मिलते, बहस भी होती है, लेकिन अगर पिता या बेटे में से किसी को कोई परेशानी हो जाए तो सबसे पहले वही एक-दूसरे की चिंता करते हैं। मेरे अपने जीवन में भी ऐसा ही रिश्ता रहा है। हम आमने-सामने कम बातें करते हैं, लेकिन अगर उन्हें कोई तकलीफ हो जाए तो सबसे पहले वही चिंता होती है। मुझे लगता है कि यही भावनात्मक जुड़ाव इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।

प्रश्न: फिल्म की कास्टिंग को लेकर आपका अनुभव कैसा रहा?

मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि इस फिल्म के लिए इतनी शानदार कास्ट मिली। सबसे पहले सोनाली और हिमांश फिल्म से जुड़े। उसके बाद हमने कहानी के हिसाब से बाकी कलाकारों को चुना। जिस-जिस कलाकार को हमने कहानी सुनाई, लगभग सभी ने तुरंत फिल्म के लिए हामी भर दी। ऐसा लगा जैसे यह पूरी टीम पहले से ही इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए बनी हो। अलका अमीन जी के साथ मेरा एक पुराना वादा भी था। मैंने उनसे पहले ही कहा था कि जब मैं निर्देशक बनूंगा तो उन्हें अपनी फिल्म में जरूर कास्ट करूंगा। इस फिल्म के जरिए वह वादा भी पूरा हो गया।


हिमांश कोहली

प्रश्न: बग्गू जैसे किरदार को निभाने के लिए आपको किस बात ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया?

मुझे यह किरदार निभाने में बहुत मजा आया क्योंकि यह मेरे लिए बिल्कुल अलग था। जिस तरह से इसे लिखा गया है और जिस तरह इसकी यात्रा आगे बढ़ती है, वह काफी दिलचस्प है। पहली बार स्क्रिप्ट सुनते ही मुझे लगा कि यह एक अलग तरह की कहानी है। जब आप कहानी शुरू करते हैं तो लगता है कि यह एक सामान्य कहानी होगी, लेकिन आगे जाकर यह आपको लगातार चौंकाती है। मैं चाहता हूं कि दर्शक फिल्म देखें और फिर बताएं कि उन्हें यह कैसी लगी।

प्रश्न: फिल्म की टैगलाइन Believe in Yourself है। आप के लिए आत्मविश्वास (Self Belief) का क्या मतलब है?

मेरे लिए खुद पर भरोसा रखना और अपनी सच्चाई के साथ जीना सबसे ज़्यादा मायने रखता है। एक कलाकार जब अपने सफर की शुरुआत करता है, तब ज़्यादातर लोग उस पर भरोसा नहीं करते। हर इंसान की ज़िंदगी में ऐसा दौर आता है, जब लोग उसे कम आंकते हैं। एक अभिनेता होने के नाते हमें लगातार रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है। कई बार आखिरी दौर तक पहुंचने के बाद भी काम नहीं मिलता। लेकिन ऐसे समय में खुद पर विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी होता है। यही बात मुझे इस फिल्म और बग्गू के किरदार से जोड़ती है।

प्रश्न: फिल्म में पिता-बेटे के रिश्ते को बहुत भावनात्मक तरीके से दिखाया गया है। आप इस रिश्ते को कैसे देखते हैं?

हमारे समाज में अक्सर पिता और बेटा एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन उसे खुलकर जाहिर नहीं कर पाते। फिल्म में भी यही रिश्ता दिखाया गया है। नीरज जी के साथ काम करते हुए मुझे महसूस हुआ कि कई बार बिना कुछ कहे भी भावनाएं समझ में आ जाती हैं। एक कलाकार के तौर पर हमारी कोशिश यही रहती है कि हर भावना चाहे खुशी हो, दुख हो, गुस्सा हो या प्यार दर्शकों तक पूरी सच्चाई के साथ पहुंचे।


प्रश्न: क्या कभी आपको इस बात की असुरक्ष होती है कि दर्शक आपको एक ही तरह के किरदारों में देखने लगेंगे?

नहीं, क्योंकि यह मेरे नियंत्रण में नहीं है कि लोग मुझे कैसे देखते हैं। मेरे हाथ में सिर्फ इतना है कि मैं अपने किरदार को कितनी ईमानदारी से निभाता हूं। इससे पहले भी मैंने अलग-अलग तरह के किरदार किए हैं। एक म्यूजिक वीडियो में मैंने 40 साल के डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति का किरदार निभाया था। उस काम के बाद मुझे एहसास हुआ कि दर्शकों की अपनी उम्मीदें होती हैं, लेकिन एक कलाकार की जिम्मेदारी उन उम्मीदों से आगे जाकर कुछ नया करना है। इस फिल्म में भी दर्शकों को मेरा बिल्कुल अलग रूप देखने को मिलेगा। मैं चाहता हूं कि हर फिल्म में लोग मुझे एक नए किरदार और नई पहचान के साथ देखें।


सोनाली सहगल

प्रश्न: इस फिल्म में ऐसा क्या अलग दिखा जिसने आपको को आकर्षित किया?

मेरे लिए किसी भी प्रोजेक्ट को चुनने में सबसे पहली और सबसे अहम चीज़ उसकी स्क्रिप्ट होती है। अगर स्क्रिप्ट अच्छी होती है, तभी मैं आगे की बातें सोचती हूं। इस फिल्म की स्क्रिप्ट मुझे बेहद पसंद आई। इसके बाद मेरा किरदार भी मुझे बहुत दिलचस्प लगा। मैं एक छोटे शहर की लड़की का किरदार निभा रही हूं, लेकिन वह बहुत चतुर और समझदार है। ऐसा किरदार मैंने पहले कभी नहीं निभाया था। इससे पहले मैं एक मॉडर्न, लंदन बेस्ड लड़की का किरदार कर चुकी थी, इसलिए यह मेरे लिए बिल्कुल अलग और चुनौतीपूर्ण अनुभव था। एक अभिनेता के तौर पर मैं हमेशा ऐसे किरदार करना चाहती हूं, जो मुझे कुछ नया करने का मौका दें।

प्रश्न: फिल्म में आपके किरदार की क्या खासियत है?

रिंकू बग्गू की ज़िंदगी में हमेशा उसका साथ देने वाली लड़की है। उसका किरदार सिर्फ एक प्रेमिका का नहीं है, बल्कि वह हर समस्या का समाधान निकालने वाली समझदार लड़की है। वह बग्गू को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। फिल्म में उनकी शादी होती है या नहीं और उनकी प्रेम कहानी किस मोड़ पर पहुंचती है, यह दर्शकों को फिल्म देखकर ही पता चलेगा।

प्रश्न: आपको खुद पर भरोसा रखने की प्रेरणा कहां से मिलती है?

जब मैं छोटी थी, तब मेरी मां को मुझ पर सबसे ज्यादा भरोसा था। उनकी वजह से मुझे खुद पर विश्वास करना आया। शादी के बाद मेरे पति भी मेरे सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम हैं। अब जब मेरा बच्चा है, तो उससे भी मुझे बहुत प्रेरणा मिलती है। जब आपका बच्चा होता है, तब वह आपको अपना सबसे बड़ा हीरो मानता है। इसलिए मेरा सबसे बड़ा सेल्फ बिलीफ मेरे परिवार से आता है। हर इंसान की जिंदगी में कभी न कभी आत्मविश्वास डगमगाता है, लेकिन ऐसे समय में अगर परिवार आपका साथ दे, तो आप फिर से मजबूत बन जाते हैं।

प्रश्न: आपने योगा सेशन और अपना योगा चैनल कैसे शुरू किया?

कोविड के दौरान मैं घर पर थी और मेरे पास काफी समय था। उसी समय मैंने योग पर ध्यान देना शुरू किया। मैं एक सर्टिफाइड योगा टीचर भी हूं, हालांकि मैं नियमित रूप से क्लास नहीं लेती। शादी और बच्चे के बाद मैंने कुछ समय के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स से ब्रेक लिया था। उस दौरान मैंने सोचा कि जो ज्ञान मैंने वर्षों में सीखा है, उसे लोगों के साथ साझा किया जाए। इसलिए मैंने अपना चैनल शुरू किया। मेरे ज्यादातर वीडियो पोस्टपार्टम रिकवरी, डिप्रेशन, बॉडी रिकवरी और फिटनेस पर होते हैं। मेरा उद्देश्य सिर्फ इतना है कि जो मैंने सीखा है, वह दूसरों के काम आए और एक अच्छी कम्युनिटी बने।

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