Exclusive Interview: मिर्जापुर द मूवी का हिस्सा बनना मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है- मोहित मलिक

Edited By Updated: 24 Sep, 2026 11:18 AM

exclusive interview of mohit malik rasika duggal with punjab kesari

फिल्म की सफलता, इसके बनने के पीछे की कहानी और इससे जुड़े दिलचस्प किस्सों को लेकर मोहित मलिक और रसिका दुग्गल ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मिर्जापुर: द मूवी’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। फिल्म के सीन से लेकर डायलॉग तक हर एक चीज दर्शकों को खूब पसंद आ रही है। फिल्म का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला सीन छटंकी और बिरजू लोहार का क्लाइमैक्स सीन रहा, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर कई मीम्स भी देखने को मिल रहे हैं। बाकी फिल्म तो बवाल है ही। अब फिल्म की सफलता, इसके बनने के पीछे की कहानी और इससे जुड़े दिलचस्प किस्सों को लेकर मोहित मलिक और रसिका दुग्गल ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...   

रसिका दुग्गल
सवाल: ‘मिर्जापुर द मूवी’ को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। इस समय आपका हेडस्पेस कैसा है?

रसिका दुग्गल: यह बहुत खूबसूरत तरीके से ओवरवेलमिंग है। मैं हर मैसेज का इंतजार करती हूं और इस बार पहली बार अपनी जिंदगी में फिल्म के नंबर भी ट्रैक कर रही हूं कि कितने लोग थिएटर में फिल्म देखने जा रहे हैं। हालांकि, नंबरों से ज्यादा मजेदार यह है कि हर घंटे फिल्म के किसी डायलॉग या सीन की नई मीम, रील या वीडियो सामने आ जाता है। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि दर्शकों ने फिल्म को इतना अपना लिया है कि वे उसे अपने तरीके से रीइंटरप्रेट और रीक्रिएट कर रहे हैं।


सवाल: बीना के किरदार को अलग-अलग तरह से समझा गया है। आपको क्या लगता है कि लोग बीना के बारे में सबसे ज्यादा क्या मिसअंडरस्टैंड करते हैं?

रसिका: जो मिसअंडरस्टैंड कर रहे हैं, वही बताएं कि उन्होंने क्या मिसअंडरस्टैंड किया है। मैं क्यों बोलूं? मेरे लिए अगर किसी किरदार के जरिए कोई कन्वर्सेशन शुरू हो सकती है तो उस किरदार के लिए वही जीत है। हम किसी को बहुत अच्छा या बहुत बुरा दिखाने नहीं आए हैं। हम यह बताने आए हैं कि लोगों में कॉम्प्लेक्सिटीज होती हैं, खासकर औरतों में। वह सिर्फ वैम्प या सीधी-सादी बहू नहीं होती। महिलाओं के बीच बहुत सारे शेड्स होते हैं। उनकी अपनी आइडेंटिटी और जिंदगी होती है। शायद लोग महिलाओं को लेबल करना पसंद करते हैं, लेकिन जब उनके बीच की कॉम्प्लेक्सिटीज और लेयर्स सामने आती हैं तो लोग अनकम्फर्टेबल हो जाते हैं। अगर बीना का किरदार लोगों को अनकम्फर्टेबल कर रहा है तो मेरे हिसाब से यह राइटिंग और कैरेक्टर दोनों की जीत है।

सवाल: बीना का किरदार महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। थिएटर में महिलाओं से मिलने पर आपको किस तरह का रिस्पॉन्स मिला?

रसिका: ज्यादातर महिलाएं मुझसे कहती हैं कि मैंने बहुत अच्छा किया और उन्हें यह रोल मजेदार लगता है। कई बार महिलाओं को इस तरह मजेदार तरीके से दिखाया नहीं जाता, इसलिए उन्हें बीना काफी स्मार्ट और एंटरटेनिंग लगती है। उन्हें इस किरदार में बहुत मजा आता है।

सवाल: बीना की पर्सनैलिटी को निभाना आपके लिए कितना एस्पिरेशनल था?

रसिका: मेरे लिए भी यह रोल एक तरह से एस्पिरेशन था। बीना जिस तरह अपनी बॉडी के साथ कम्फर्टेबल है, उस तरह से हम असल जीवन में अक्सर नहीं हो पाते। हमारे आसपास बहुत सारी पैट्रिआर्कल चीजें होती हैं, जिन्हें हम जाने-अनजाने इंटरनलाइज कर लेते हैं। हम इंटेलेक्चुअली भले ही अलग सोचते हों, लेकिन हम उसी समाज में पले-बढ़े हैं। उनसे खुद को कॉन्शियसली तोड़ना पड़ता है। बीना के जरिए मुझे वह कॉन्फिडेंस जीने का मौका मिला, जिसके साथ मैं शायद असल जीवन में नहीं चल पाती।


मोहित मलिक
सवाल: आपके पिछले प्रोजेक्ट्स के बाद ‘मिर्जापुर द मूवी’ की सफलता को आप किस तरह देखते हैं? क्या इसे कमबैक कहेंगे?

मोहित मलिक: मेरे लिए कोई सेटबैक नहीं है। मेहनत हमेशा उतनी ही रहती है। फिल्म चलेगी या नहीं, यह दर्शकों के हाथ में होता है। मैं बहुत शुक्रगुजार हूं कि फिल्म को इतना प्यार मिला। लोग बीना और बिरजू की लव स्टोरी, गाने और हमारे किरदारों से जुड़ रहे हैं। जिस तरह का प्यार हमें मिल रहा है वह बहुत ग्रैटिफाइंग है। कभी-कभी लगता है कि कोई चुटकी काटकर इस सपने से बाहर निकाल देगा। यह सपना सच होने जैसा है।

सवाल: आपके आखिरी सीन में काफी इमोशन्स थे। उस सीन को करते समय सबसे मुश्किल क्या था?

मोहित: वह मेरे लिए सबसे जरूरी और मुश्किल मोमेंट्स में से एक था। उस सीन में बिना कुछ कहे बहुत कुछ कहना था। जब आप सामने वाले को देखते हैं, जिस तरह से वह आपको देखता है, छोटे-छोटे जेस्चर्स होते हैं, वे सब बहुत मायने रखते हैं। हमने अपने-अपने टेक्स्ट वर्क और बैकस्टोरी पर काम किया था, लेकिन सेट पर क्या होगा, यह आपको पता नहीं होता। उस मोमेंट में रसिका ने जिस तरह मुझे देखा और मैंने जिस तरह रिएक्ट किया, वह अपने आप हुआ। हम किसी तरह एक सिंक में आ गए थे। मेरे लिए वह बहुत सेक्रेड और स्पिरिचुअल स्पेस था। मैंने इस सीन को हमेशा एक मेटाफर की तरह देखा कि बिरजू उस परवाने की तरह है, जो शमा के पास जाकर मुक्ति पाना चाहता है।

सवाल: अगर बिरजू से उसकी बंदूक, एक्शन और बाकी ताकतें हटा दी जाएं तो उसकी सबसे बड़ी ताकत क्या बचती है?

मोहित: उसका प्यार, उसका इश्क और उसकी इबादत वाली मोहब्बत ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। वही उसे ड्राइव करती है। वह बीना की जिंदगी में सुरक्षा और कम्फर्ट वापस लाना चाहता है। उसके लिए वही सबसे बड़ी ताकत है।


सवाल: आप दोनों पहली बार कब मिले थे? क्या ‘मिर्जापुर द मूवी’ से पहले आपकी कोई मुलाकात हुई थी?

रसिका दुग्गल: नहीं, हम बिल्कुल नहीं मिले थे। फिल्म शुरू होने से पहले जिस दिन पूजा थी, उसी दिन हम पहली बार मिले थे। मजेदार बात यह है कि किसी ने हमें ठीक से इंट्रोड्यूस भी नहीं कराया। इतने सारे एक्टर्स थे कि शायद लोग भूल गए कि हम दोनों पहली बार मिल रहे हैं।

मोहित मलिक: मैं तो पूजा में पीछे बैठा था और किसी को ज्यादा जानता भी नहीं था। रसिका और बाकी लोग आगे बैठे थे। यहां तक कि सुशांत जी, जिनके साथ मैंने पहले काम किया था उन्होंने भी मुझे देखकर ऐसे आगे बढ़ गए जैसे पहचानते ही नहीं हों। मुझे लगा कि यार ये क्या हो गया! मैंने तो वहीं उन्हें जज कर लिया कि शायद इनमें एटिट्यूड आ गया है। बाद में धीरे-धीरे सब लोगों से मुलाकात हुई और फिर रसिका के साथ काम शुरू हुआ।

सवाल: आप दोनों ने साथ काम करने से पहले कोई खास वर्कशॉप की थी?

रसिका: पहले शेड्यूल से पहले हमारी वर्कशॉप नहीं हुई थी। दो शेड्यूल्स के बीच में वर्कशॉप हुई थी। सबसे मुश्किल सीन भी उसी पहले शेड्यूल्स में था। हम दोनों काफी नर्वस थे। मुझे लगता है कि हम अपनी नर्वसनेस की वजह से ही बॉन्ड कर पाए। इन सबके अलावा हमारी पूरी टीम काफी अच्छी है।

मोहित: वर्कशॉप जरूरी होती है, खासकर जब दो एक्टर्स को एक-दूसरे के साथ पेसिंग और केमिस्ट्री बनानी हो। लेकिन हमारे पहले सीन के समय वह नहीं हो पाई थी। मैंने अपने किरदार की पूरी बैकस्टोरी अपने दिमाग में बनाई थी। मेरा पहला सीन ही पंकज जी के साथ फाइट सीक्वेंस था, इसलिए मैं काफी नर्वस था। मैंने उस नर्वस एनर्जी को सीन की इंटेंसिटी में इस्तेमाल करने की कोशिश की।


सवाल: ‘मिर्जापुर द मूवी’ की सफलता को कई लोग बिना बड़े स्टार नामों वाली फिल्मों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देख रहे हैं। आप इसे किस तरह देखते हैं?

रसिका: पिछले कुछ दिनों में इंडस्ट्री के कई लोगों के मैसेज आए हैं और उनकी जेन्युइन वॉर्म्थ महसूस हुई है। जब आपके पीयर्स आपके काम को देखकर खुश होते हैं और आपको लगता है कि वे चाहते हैं कि आपको वह रिकॉग्निशन मिले जिसके आप हकदार हैं, तो यह बहुत बड़ी बात होती है।

मोहित: पहले भी इंडस्ट्री में लोग एक-दूसरे की सक्सेस और फेल्यर में साथ खड़े होते थे। मेरे लिए भी ‘मिर्जापुर’ का हिस्सा बनना एक सपना था। इसमें काम करने वाले सभी कलाकार मेरे लिए बहुत बड़े एक्टर्स हैं। उनके साथ काम करना मेरे लिए बहुत एक्साइटिंग था।


सवाल: फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके किरदार हैं। आपको क्या लगता है कि दर्शक इन किरदारों से इतने लंबे समय तक क्यों जुड़े हुए हैं?

मोहित: बीना, कालीन भैया और बाकी किरदार इतने बड़े और यादगार हैं कि लोग किरदारों के लिए फिल्म देखने आ रहे हैं। इसका पूरा क्रेडिट एक्टर्स के साथ-साथ पुनीत कृष्णा को जाता है, जिन्होंने इन किरदारों को इतनी अच्छी तरह लिखा। गुरमीत सिंह ने भी उन्हें बहुत खूबसूरती से पर्दे पर उतारा। जब दर्शक किरदारों के लिए आते हैं और फिर फिल्म को भी पसंद करते हैं, तो यह बहुत अच्छी बात है।

रसिका: किसी कहानी की असली ताकत यही होती है कि वह लंबे समय तक सर्वाइव करे। आप उसमें कितना भी जैज़ या स्नैज़ डाल दें, अगर दर्शकों का किरदारों से लगाव नहीं है, उनसे रिलेटेबिलिटी नहीं है तो वह ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। इसके लिए राइटिंग की फाउंडेशन बहुत मजबूत होनी चाहिए। पुनीत ने ‘मिर्जापुर’ के साथ शानदार काम किया है। मुझे नहीं लगता कि पुनीत कृष्णा के अलावा कोई और ‘मिर्जापुर’ को इस तरह लिख सकता है। उनके लिए ये किरदार और दुनिया बहुत नैचुरल हैं।

सवाल: जो लोग ‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज नहीं देख चुके हैं, क्या वे सीधे फिल्म देखकर कहानी समझ सकते हैं?

मोहित: बिल्कुल। जिन्होंने वेब शो नहीं देखा है, वे भी फिल्म देखकर उसकी कहानी समझ सकते हैं।

रसिका: यही फिल्म की खूबसूरती है। मैंने फिल्म की पहली 50 मिनट की फुटेज देखी थी और मुझे लगा कि यह बहुत क्लेवरली बनाई गई है। जिसने पहले ‘मिर्जापुर’ देखा है, उसके लिए नॉस्टैल्जिया है और जिसने नहीं देखा, उसके लिए नए किरदारों के जरिए एक इंट्रोडक्शन है। जिन लोगों ने पहले शो नहीं देखा, वे भी थिएटर में दर्शकों के रिएक्शन्स देखकर कई बार सोचते हैं कि लोग किसी पर्टिकुलर डायलॉग या मोमेंट पर इतना रिएक्ट क्यों कर रहे हैं। बाद में उन्हें समझ आता है कि वह किसी पुराने मोमेंट का रिकॉल है।

सवाल: ‘मिर्जापुर द मूवी’ के बाद आपके आने वाले प्रोजेक्ट कौन से हैं?

मोहित: फिलहाल ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं है जिसकी शूटिंग पूरी हो चुकी हो और जिसके बारे में मैं बात कर सकूं।

रसिका दुग्गल: एक प्रोजेक्ट है जिसे मैं शुरू करने वाली हूं, लेकिन उसके बारे में अभी बात नहीं कर सकती। इसके अलावा ‘लिटिल थॉमस’ नाम की एक बहुत खूबसूरत चिल्ड्रन्स फिल्म है जिसमें गुलशन देवैया और एक बहुत टैलेंटेड चाइल्ड एक्टर ऋदांश हैं। फिल्म फेस्टिवल सर्किट में जा चुकी है और अगले महीने रिलीज हो रही है। मेरे लिए यह खुशी की बात है कि करियर में एक तरफ बड़ी फिल्म है जो बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कर रही है और दूसरी तरफ बच्चों के लिए बनी फिल्म भी है। भारत में बच्चों के लिए इस तरह का कंटेंट काफी कम बनता है। मेरे ऐसे दोस्त जिनके बच्चे हैं, वे अक्सर कहते हैं कि उन्हें समझ नहीं आता कि बच्चों को कौन-सी फिल्म दिखाने ले जाएं। इसलिए मुझे उम्मीद है कि ‘लिटिल थॉमस’ उस गैप को थोड़ा भर पाएगी।

 

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