Edited By Prachi Sharma,Updated: 17 Sep, 2026 06:51 PM
Mirzapur The Movie : दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को निर्देश दिया कि वह 'मिर्ज़ापुर: द मूवी' के मेकर्स के उस प्रस्ताव पर एक हफ्ते के भीतर फैसला ले, जिसमें फिल्म के क्लाइमेक्स में 'शूरवीर' गाने को...
Mirzapur The Movie : दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को निर्देश दिया कि वह 'मिर्ज़ापुर: द मूवी' के मेकर्स के उस प्रस्ताव पर एक हफ्ते के भीतर फैसला ले, जिसमें फिल्म के क्लाइमेक्स में 'शूरवीर' गाने को बैकग्राउंड म्यूजिक से बदलने की बात कही गई है।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच प्रशांत कुमार सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें फ़िल्म से गाना हटाने या उसे किसी दूसरे बैकग्राउंड स्कोर से बदलने की मांग की गई थी।
याचिका में कहा गया है कि रैपेरिया बालम द्वारा कंपोज किया गया 'शूरवीर' गाना 2020 में महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि के तौर पर रिलीज किया गया था। इसमें कहा गया है कि गाना मेवाड़, चेतक, सम्मान, बलिदान, मातृभूमि की रक्षा और महाराणा प्रताप की विरासत का जिक्र करता है।
याचिका के अनुसार, इस गाने का इस्तेमाल 'मिर्ज़ापुर: द मूवी' में गैंगस्टर और क्रिमिनल किरदारों वाले सीन में किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म में संगठित अपराध, गैंग की दुश्मनी, हिंसा, अवैध हथियार, ड्रग्स, जबरन वसूली, हत्या और अन्य आपराधिक गतिविधियों को दिखाया गया है। उन्होंने चिंता जताई है कि ऐसे माहौल में गाने के इस्तेमाल से महाराणा प्रताप से जुड़े आदर्शों और फ़िल्म में दिखाए गए किरदारों के बीच एक गलत संबंध बन सकता है।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने साफ किया है कि वह सिनेमा में अपराध, हिंसा या गैंगस्टर किरदारों के चित्रण को चुनौती नहीं दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि PIL का संबंध गाने से जुड़े कॉपीराइट, लाइसेंसिंग या सहमति के मुद्दों से नहीं है। उनकी चुनौती सिर्फ़ उस खास सीन में गाने के इस्तेमाल और फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़े कानूनों के पालन तक सीमित है। यह याचिका सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 की धारा 5B और लागू फिल्म-सर्टिफिकेशन गाइडलाइंस पर आधारित है। इसमें खास तौर पर असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने या सही ठहराने से जुड़े प्रावधानों का जिक्र किया गया है और संबंधित अधिकारियों से विवादित हिस्से की जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर फ़िल्म की क्लिप और संगीत के तेजी से फैलने पर भी चिंता जताई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि कंटेंट को उसके मूल संदर्भ से अलग देखा जा सकता है और आरोप लगाया गया है कि इस तरह के जुड़ाव का युवा और आसानी से प्रभावित होने वाले दर्शकों पर असर पड़ सकता है। यह PIL भारत सरकार, CBFC और फ़िल्म के प्रोड्यूसर एक्सेल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के ख़िलाफ़ दायर की गई है।
गाने को हटाने या बदलने की मांग के अलावा, याचिकाकर्ता ने CBFC से विवादित हिस्से के संबंध में फिल्म के सर्टिफिकेशन की समीक्षा करने को कहा है। उन्होंने ऐतिहासिक या सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हस्तियों से जुड़े गानों, संगीत, दृश्यों और अन्य कलात्मक सामग्री के इस्तेमाल के लिए गाइडलाइंस बनाने के निर्देश भी मांगे हैं, साथ ही कलात्मक स्वतंत्रता के साथ ऐसे इस्तेमाल में संतुलन बनाने की बात भी कही है।
याचिका में केस के लंबित रहने के दौरान गाने को म्यूट करने के लिए अंतरिम राहत की भी मांग की गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने साफ़ तौर पर कहा है कि वह पूरी फ़िल्म के प्रदर्शन या स्ट्रीमिंग पर रोक नहीं मांग रहे हैं और केवल उस खास बैकग्राउंड म्यूज़िक के संबंध में राहत मांग रहे हैं। गुरुवार की सुनवाई के दौरान, मेकर्स की ओर से पेश वकील ने कहा कि गाने का इस्तेमाल क्लाइमेक्स में दो गुटों के बीच लड़ाई के दौरान बैकग्राउंड म्यूजिक के तौर पर किया गया था और इसे किसी किरदार द्वारा नहीं गाया जा रहा था। वकील ने यह भी कहा कि किरदारों और महाराणा प्रताप के बीच कोई तुलना नहीं थी।
बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि पहली नजर में, गाने का इस्तेमाल अच्छी बात नहीं लगती और सवाल किया कि क्या स्थिति उस स्तर पर पहुंच गई है जहां "हम हिंसा का महिमामंडन कर रहे हैं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह PIL के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दे रहा है। कोर्ट को बताया गया कि प्रोड्यूसर पहले ही सिनेमैटोग्राफ रूल्स, 2024 के नियम 31 के तहत CBFC से संपर्क कर चुके हैं और प्रस्तावित बदलावों के लिए फ़ॉर्म III जमा कर चुके हैं, जिसमें गाने को बैकग्राउंड म्यूजिक से बदलना भी शामिल है। CBFC ने कोर्ट को बताया कि वह प्रस्ताव पर विचार करेगा और एक हफ्ते के भीतर फैसला लेगा।