'ग्राम चिकित्सालय': शहरी डॉक्टर की ग्रामीण सच्चाइयों से टक्कर, TVF की नई दिल छूने वाली सीरीज

Updated: 09 May, 2025 11:11 AM

gram chikitsalay review in hindi

यहां पढ़ें कैसी है सीरीज ग्राम चिकित्सालय

सीरीज: ग्राम चिकित्सालय (Gram Chikitsalay)
डायरेक्शन: राहुल पांडे ( Rahul pandey)
कलाकार: अमोल पराशर (Amol Parashar), विनय पाठक (Vinay Pathak), आनंदेश्वर द्विवेदी (Anandeshwar Dwivedi)

ओटीटी प्लेटफार्म: प्राइम वीडियो
रेटिंग: 3.5*


Gram Chikitsalay: पंचायत और दुपहिया के बाद, प्राइम वीडियो पर टीवीएफ एक और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाली सीरीज लेकर आया है ‘ग्राम चिकित्सालय’। यह सीरीज एक युवा डॉक्टर की कहानी है, जो शहरी जीवन छोड़कर झारखंड के एक काल्पनिक गांव भटकंडी में सेवा करने आता है। अमोल पाराशर द्वारा निभाया गया डॉ. प्रभात सिन्हा का किरदार हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि सिर्फ नीयत अच्छी होना काफी नहीं, हालातों के मुताबिक खुद को ढ़ालना भी जरूरी है।

कहानी
सीरीज की शुरुआत होती है 92 वर्षीय सिपाही चौधरी की मृत्यु से, जो गांव के खुद को डॉक्टर कहने वाले चेतक कुमार (विनय पाठक) के इलाज से दम तोड़ देते हैं। इसके बावजूद गांव वाले चेतक पर ही भरोसा जताते हैं। वहीं दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेज का टॉपर डॉ. सिन्हा अपने सरकारी क्लिनिक में घंटों मरीजों का इंतजार करता रह जाता है। गांव के लोग पुराने तरीकों और भरोसे से इतने बंधे हैं कि उन्हें असली डॉक्टर की कद्र नहीं।

डॉ. सिन्हा जब गांव के पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पहुंचते हैं, तो वहां की हालत देखकर दंग रह जाते हैं सुविधाएं नदारद, रास्ते तक अवरुद्ध। जब वे बदलाव की कोशिश करते हैं, तो गांव का एक किसान आत्महत्या की धमकी दे देता है। पुलिस का दखल उल्टा असर डालता है और सिन्हा समझ जाते हैं कि बदलाव लाने के लिए पहले उन्हें खुद को बदलना होगा। कहानी में खूब हास्य और व्यंग्य है इसे जानने के लिए आपको पूरी सीरीज देखनी होगी।

अभिनय 
अमोल पाराशर ने डॉ. सिन्हा के रूप में शानदार अभिनय किया है। वे एक ऐसे युवक को दर्शाते हैं, जो आदर्शवाद और जमीनी हकीकतों के बीच फंसा हुआ है। विनय पाठक ने झोलाछाप चेतक कुमार के रूप में दर्शकों को चिढ़ाया भी और हंसाया भी। आनंदेश्वर द्विवेदी (फुटनी कम्पाउंडर) और आकाश मखीजा (गोबिंद वार्ड बॉय) ने हल्के-फुल्के हास्य से शो को संतुलन प्रदान किया है। नर्स इंदु के किरदार में गरिमा सिंह ने गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ अपनी भूमिका निभाई है, जबकि उनके बेटे के किरदार में संतू कुमार ने कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ी है। आकांक्षा रंजन (डॉ. गार्गी) को भले ही सीमित स्क्रीनटाइम मिला हो, लेकिन उनका डॉ. सिन्हा के साथ स्कूटी वाला सीन खासा असर छोड़ता है।

निर्देशन
राहुल पांडे के निर्देशन में बनी यह सीरीज न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था, सामाजिक मनोविज्ञान और बदलाव की प्रक्रिया जैसे विषयों पर सवाल भी उठाती है। दीपक कुमार मिश्रा और अरुणाभ कुमार का निर्माण कौशल इसे ‘पंचायत’ और ‘गुल्लक’ जैसी लोकप्रिय सीरीज की कतार में खड़ा करता है।

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