चीन की सेना में कुछ ठीक नहीं! जिनपिंग के करीबी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी आऊट,सैंकड़ों अफसर लापता व टॉप जनरल जेल में

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 07:47 PM

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लंदन स्थित IISS की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई चल रही है। कई वरिष्ठ जनरल हटाए गए हैं, 100 से अधिक अधिकारी लापता बताए गए हैं। इस बीच चीन का रक्षा बजट तेजी से बढ़कर एशिया के कुल खर्च का...

London: लंदन स्थित IISS की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई चल रही है। लंदन के International Institute for Strategic Studies (IISS) ने अपनी वार्षिक मिलिट्री बैलेंस रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन की People's Liberation Army (PLA) में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के चलते कमांड स्ट्रक्चर में “गंभीर कमियां” पैदा हो गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह जांच अभियान ताकतवर Central Military Commission (CMC), थिएटर कमांड, हथियार खरीद एजेंसियों और डिफेंस अकादमिक संस्थानों तक फैला है।

 

टॉप जनरल बाहर, CMC में सिर्फ 2 सदस्य
रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति Xi Jinping के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया गया है। सात सदस्यीय CMC में अब केवल दो सदस्य बचे बताए जा रहे हैं शी जिनपिंग (चेयरमैन) और नए वाइस चेयरमैन झांग शेंगमिन। सैन्य कॉन्ट्रैक्ट में धांधली, खराब हथियारों की खरीद और संदिग्ध कनेक्शन के आरोपों में 100 से ज्यादा हाई-लेवल अधिकारियों के लापता या हिरासत में होने की खबर है।

 

 रक्षा खर्च में रिकॉर्ड उछाल
IISS के अनुसार एशिया के कुल रक्षा खर्च में चीन की हिस्सेदारी 2025 में करीब 44% तक पहुंच गई है, जबकि 2010-2020 के बीच यह औसतन 37% थी। भले ही सेना के अंदर सफाई अभियान चल रहा हो, लेकिन आधुनिकीकरण और सैन्य विस्तार की रफ्तार जारी है। रिपोर्ट में 2025 में ताइवान के आसपास चीन की बढ़ती सैन्य तैनाती का भी जिक्र है। इसे क्षेत्रीय दावों और कूटनीतिक दबदबे को मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है।

 

हाल ही में वर्चुअल संबोधन में शी जिनपिंग ने कहा था “पिछला साल असामान्य और बहुत खास रहा है… पीपल्स आर्मी ने करप्शन के खिलाफ लड़ाई में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं।” चीन की सेना में चल रहा यह ‘सफाई अभियान’ जहां एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर कमांड स्ट्रक्चर में अस्थिरता और शक्ति संतुलन पर सवाल भी खड़े करता है। एशिया में बढ़ते रक्षा खर्च और ताइवान के आसपास गतिविधियों के बीच यह घटनाक्रम वैश्विक रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

 

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