Happy Patel: Khatarnak Jasoos Review: कॉमेडी–थ्रिलर के नाम पर बासी जोक्स और ढीला निर्देशन

Updated: 16 Jan, 2026 01:06 PM

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यहां पढ़ें कैसी है हैप्पी पटेल : खतरनाक जासूस

फिल्म- हैप्पी पटेल : खतरनाक जासूस (Happy Patel: Khatarnak Jasoos)
स्टारकास्ट- वीर दास (Vir Das), मोना सिंह (Mona Singh), इमरान खान (Imran Khan), अभिषेक भालेराव (Abhishek Bhalerao), शारिब हाशमी (Sharib Hashmi)
निर्देशक: वीर दास (Vir Das), कवि शास्त्री (Kavi Shastri)
निर्माता: आमिर खान (Aamir Khan)
रेटिंग: 2*

Happy Patel: Khatarnak Jasoos-  
वीर दास, जो कि स्टैंडअप कॉमेडी की दुनिया में अपनी विशेष पहचान बना चुके हैं, अपनी फिल्म "हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस" में अभिनय और निर्देशन दोनों के क्षेत्र में हाथ आजमा रहे हैं। यह फिल्म खुद को एक कॉमेडी–स्पाई थ्रिलर के रूप में प्रस्तुत करती है, लेकिन असल में यह न तो दर्शकों को हंसा पाती है और न ही रोमांचित कर पाती है। फिल्म की कहानी और अभिनय दोनों ही कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ पाते, जिससे फिल्म अपनी मंशा को पूरा करने में नाकाम रहती है।


कहानी
कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसे जासूसी का शौक है लेकिन उसका ज्ञान सिर्फ फिल्मी संदर्भों पर आधारित है। उसे अपनी असली जासूसी की दुनिया में कदम रखने का मौका मिलता है लेकिन फिल्म की स्क्रिप्ट में वह गहराई नहीं है जो एक अच्छा थ्रिलर बनाने के लिए जरूरी होती है। क्राइम, सस्पेंस और थ्रिल के नाम पर जो कुछ दिखाया गया है वह अधिकतर उथला और नीरस लगता है। फिल्म की कहानी कहीं से भी दर्शकों को खींचने या कोई खास इमोशन जगाने में सफल नहीं हो पाती।

अभिनय
वीर दास जो अपनी स्टैंडअप कॉमेडी से बेहद चर्चित हैं इस फिल्म में भी वही पुराने पंच और एक्सप्रेशन दोहराते नजर आते हैं। उनकी एक्टिंग में वह खास बात नहीं दिखती, जो उन्हें एक अभिनेता के रूप में स्थापित कर सके। ऐसा लगता है जैसे वह स्टैंडअप कॉमेडी मंच से बाहर निकलकर किसी फिल्म का हिस्सा बन गए हों लेकिन उनका फॉर्मूला वही पुराना है। मोना सिंह का किरदार भी फिल्म में बहुत प्रभावी नहीं लगता, और बाकी कलाकार भी आते-जाते रहते हैं, परंतु फिल्म पर उनका कोई खास असर नहीं पड़ता।

निर्देशन
वीर दास ने इस फिल्म का निर्देशन भी किया है और यह उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है। फिल्म का स्क्रीनप्ले बेहद ढीला है और कई सीन बिना तालमेल के जुड़े हुए लगते हैं। फिल्म की गति बहुत धीमी हो जाती है, और कई जगह तो यह तीन घंटे जैसी महसूस होती है। कुछ सीन तो ऐसे हैं जो कहानी से बिल्कुल भी जुड़े हुए नहीं हैं, और ये फिल्म के बहाव को और कमजोर बना देते हैं। निर्देशन में ज्यादा दम नहीं है, और यह फिल्म को एक ऊबाऊ अनुभव बना देता है।


निष्कर्ष
"हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस" एक ऐसी फिल्म है जो बड़े नामों और बड़े दावों के बावजूद अपने कंटेंट में पूरी तरह असफल रहती है। न तो इसमें कॉमेडी का कोई दम है, और न ही यह एक स्पाई थ्रिलर के रूप में रोमांचकारी है। यह फिल्म अपने असमर्थ निर्देशन, कमजोर कहानी और सुस्त अभिनय के कारण पूरी तरह फ्लॉप साबित होती है।

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