'जूही मुई' में ऑटिस्टिक लड़की का किरदार निभाना बड़ी जिम्मेदारी थी : ईशा सिंह

Edited By Updated: 13 Jul, 2026 11:33 AM

isha singh and vijyendra kumeria exclusive interview for show juhi mui

जूही मुई शो को लेकर मुख्य कलाकार ईशा सिंह और विजयेंद्र कुमेरिया ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बिग बॉस फेम एक्ट्रेस ईशा सिंह इस समय कलर्स टीवी के नए शो 'जूही मुई' में नजर आ रही हैं। इस शो में वह पहली बार एक ऑटिस्टिक लड़की का किरदार निभा रही हैं। जुही मुई' की कहानी जुही सूरी (ईशा सिंह) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक प्रतिभाशाली ऑटिस्टिक युवती है। शो का उद्देश्य ऑटिज्म जैसे विषय के प्रति जागरुकता बढ़ाना है। शो को लेकर मुख्य कलाकार ईशा सिंह और विजयेंद्र कुमेरिया ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

ईशा सिंह

सवाल: 'जूही मुई' में ऑटिस्टिक लड़की का किरदार निभाना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
ऑटिज्म एक ऐसा विषय है जिसके बारे में लोगों को पता ही नहीं है। तो मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि मैं एक ऑटिस्टिक लड़की का किरदार निभा रही हूं तो मैं कुछ ऐसा न कर दूं जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे या फिर मैं उसे उनती ही गंभीरता से निभा सकूं। मैं अपने आप को बहुत खुशकिस्मत मानती हूं कि इस शो का मैं हिस्सा हूं और इस तरह का किरदार निभाने की मेरी हमेशा से ख्वाहिश थी। ये कोई रेगुलर गर्ल नहीं, कोई ग्लैमरस हिरोइन नहीं है तो मेरे कंधो पर इस किरदार को अच्छे से निभाने की  जिम्मेदारी भी कहीं ज्यादा थी। 

सवाल: जूही के लिए आपने किस तरह की रिसर्च और तैयारी की?
इस किरदार के लिए मैंने बहुत मेहनत की है। इस तरह का रोल मेनैं मैनिफेस्ट किया था। इस भूमिका को ईमानदारी से निभाने के लिए मैंने वर्कशॉप्स अटेंड कीं, ऑटिज़्म से जुड़े लोगों से मुलाकात की, उनके अनुभव सुने, इंटरव्यू देखे और गहराई से रिसर्च की। मेरी पूरी कोशिश यही रही है कि इस किरदार के जरिए जिन लोगों की कहानी सामने आ रही है, उनकी भावनाओं और अनुभवों का पूरी संवेदनशीलता के साथ सम्मान किया जाए।

सवाल: ऑटिज्म को पर्दे पर संवेदनशील तरीके से दिखाना कितना जरूरी मानती हैं?
बहुत जरुरी मानती हूं। इस शो का उद्देश्य ही यही है कि इसके जरिए लोग ऑटिज्म को समझें। आज के समय में लोगों को ऑटिज्म की समझ ही नहीं है और इस तरह के लोगों को समाज एक लेबल दे देता है पागल बोल देता है। यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसॉडर है जिसमें सोचने समझने की क्षमता अलग होती है बिहेवियर अलग होता है। लेकिन वो हमसे ज्यादा सेंसिटिव और समझदार होते हैं। उन्हें समझने की जरूरत है।

सवाल: इस किरदार को निभाने के बाद आप में किस तरह के बदलाव आए हैं?
जूही की भूमिका के बाद मैं और ज्यादा सवेंदनशील हो गई हूं। मैं ऑटिज्म के बारे में हमेशा से जानती थी लेकिन इतनी गहराई से मुझे इसके बारे में नहीं पता था। उन्हें क्या अच्छा लगता है क्या बुरा लगता है। अहर हम उनके लिए कुछ नहीं कर सकते तो उनके प्रति थोड़े दयालु तो हो सकते हैं। मेरे मन में उनके लिए हमदर्दी और बढ़ गई है।

सवाल: आपके काम में अक्सर सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषय देखने को मिलते हैं। क्या यह एक सोची-समझी पसंद है?
मुझे लगता है कि मैं इस मामले में काफी खुशकिस्मत रही हूं। मेरे करियर की शुरुआत 'इश्क का रंग सफेद' से हुई, जो विधवा पुनर्विवाह जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आधारित था। इसके बाद 'इश्क सुभान अल्लाह' में ट्रिपल तलाक जैसे अहम विषय पर काम करने का मौका मिला और अब मैं ऑटिज्म जैसे महत्वपूर्ण विषय से जुड़ी कहानी का हिस्सा हूं। एक कलाकार के तौर पर अगर मेरे किरदार लोगों तक जागरूकता और सकारात्मक संदेश पहुंचाने में मदद करते हैं। मैं चाहती हूं मैं अपने शोज के जरिए न केवल लोगों का मनोरजंन करुं बल्कि एक संदेश भी दे पाऊं।


विजयेंद्र कुमेरिया 

सवाल: ऑटिज्म जैसे संवेदनशील विषय पर आधारित शो का हिस्सा बनना आपके लिए कितना खास है?
इस शो की सबसे खास बात यह है कि यह मनोरंजन के साथ जागरुकता की भी बात करता है। कैसे हमे एक अच्छा इंसान बनना चाहिए कैसे अगर कोई स्पेशल है तो उसके का साथ किस तरह का बर्ताव करना चाहिए। उससे हमदर्दी दिखानी चाहिए। भगवान ने हमे एक सा बना के भेजा है बस कुथ अलग हैं तो उनके प्रति संवेदनशीलता होनी चाहिए। मैं इस शो का हिस्सा हूं मेरे लिए यह बहुत खास अनुभव है। मेरे बाकी शोज से हटकर है यह शो। इस शो के जरिए हम लोगों तक एक खास संदेश पहुंचाने का प्रयास भी कर रहे हैं।

सवाल: एक अभिनेता के तौर पर ऐसे किरदार चुनते समय आप किन बातों को प्राथमिकता देते हैं?
मेरे पास अगर किसी रोल को लेकर दो, तीन ऑप्शन होते हैं तो मैं हमेशा नयापन चुनता हूं जो मैंने पहले न किया हो। मुझे रिपीट करना पसंद नहीं है और अब तक का हर किरदार मेरा पहले से थोड़ा अलग होता है। एक अभिनेता के तौर पर वो थोड़ा संतुष्टि भी देता है और चुनौतीपूर्ण भी होता है हर बार एक नया किरदार निभाना। मुझे लगता है कि अगर मैं एक ही तरह के किरदार निभाता रहूंगा तो मैं और मेरे दर्शक दोनों बोर हो जाएंगे। तो नएपन के आधार पर ही मैं अपने किसी भी किरदार के लिए चुनाव करता हूं।

सवाल: इस शो में संयम सिंह के किरदार के बारे में कुछ बताइए?  
सयंम सिंह का किरदार बहुत ही मजेदार है। जो जूही से बहुत ही अलग है। जूही एक छुई मुई सी लड़की है और सयंम एक हरियाणवी बंदा है जो पुलिसवाला है। एक दम एंग्री यंग मैन भी नहीं है ये वो है जैसे को तैसा टाइप। जूही के साथ ही वो बहुत ओवर प्रोटैक्टिव नहीं है बल्कि वो उसे हर काम करने का हौसला देता है।

सवाल: कहीं न कहीं शो पैरेटिंग को लेकर भी बात करता है आप भी एक पिता है आपके लिए एक अच्छी पैरेटिंग क्या है?  
मुझे लगता है कि हम बच्चो के साथ ओवर प्रोटेक्टिव हो चुके हैं जो कि गलत है हम हर चीज के लिए उनकी सुरक्षा के नाम पर उन्हें खुलकर रहने का मौका नहीं देते। बाहर मत जाओ, ये मत करों वो मत करो। हमें उन्हें थोड़ा एक्सप्लोर का मौका देना चाहिए। कई बार ये ओवर प्रोटैक्टिव होने से बच्चे बिगड़ भी जाते हैं। मेरा मानना है आप खूब लाड़ प्यार कीजिए लेकिन एक अनुशासन के साथ। बच्चों के लिए अनुशासन बना के रखना बहुत जरुरी है।

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