Edited By Mansi,Updated: 03 Apr, 2026 10:44 AM

यहां पढ़ें कैसी है सीरीज मां का सम
Review: मां का सम (Maa Ka Sum)
कलाकार: मोना सिंह (Mona Singh), मिहिर आहुजा (Mihir Ahuja),अंगिरा धर (Angira Dhar),रणवीर बरार (Ranveer Brar),सेलेस्टी बैरागी (Celestee Bairagey) और पूजा बनर्जी (Puja Banerjee)
निर्देशक: निकोलस खरकोंगोर (Nicholas Kharkongor)
रेटिंग: 3*
Maa Ka Sum: प्राइम वीडियो लेकर आया है मां बेटे के रिश्ते की एक खास और इमोशनल कहानी मां का सम। जी हां सीरीज का नाम थोड़ा डिफरेंट है क्योंकी कहानी में मां बेटे के रिश्ते को एक अनोखे और नए तरीके से दिखाया है। टीवी से फिल्मों और अब ओटीटी का सफर तय करने वाली मोना सिंह एक बार फिर से खुद को साबित करती नजर आ रही है। सीरीज में मोना सिंह के अलावा मिहिर आहुजा, रणवीर बरार, अंगिरा धर जैसे किरदार मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। आइए जानते है कैसी है सीरीज मां का सम।
कहानी
सीरीज की कहानी एक मां-बेटे, अगस्त्य और विनीता के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। अगस्त्य एक होशियार और समझदार कॉलेज स्टूडेंट है, जो हर समस्या को गणित के नजरिए से हल करने की कोशिश करता है। कुछ ही महीनों में उसे आगे की पढ़ाई के लिए घर छोड़कर जाना है, लेकिन उससे पहले वह अपनी सिंगल मदर विनीता की जिंदगी को संभालना चाहता है। विनीता ने जीवन में कई मुश्किलें झेली हैं। उनके पति अचानक उन्हें छोड़कर चले गए थे, जिसके बाद उन्होंने अकेले ही अपने बेटे अगस्त्य की परवरिश की।
अगस्त्य चाहता है कि उसकी मां को भी जिंदगी में एक अच्छा साथी मिले। इसके लिए वह अपनी मैथ्स स्किल्स का इस्तेमाल करता है और डेटिंग ऐप्स पर अलग-अलग समीकरणों और गणनाओं के जरिए मां के लिए सही पार्टनर ढूंढने की कोशिश करता है। हालांकि, हर बार उसे वैसा नतीजा नहीं मिलता जैसा वह सोचता है। अगस्त्य और विनीता की जिंदगी में मोड़ तब आता है जब अंगिरा धर और रणवीर बरार के किरदारों की एंट्री होती है। क्या अगस्त्य सच में अपनी मां के लिए सही जीवनसाथी ढूंढ पाएगा और क्या विनीता अपनी जिंदगी की नई शुरुआत कर पाएंगी। ये जानने के लिए आपको सीरीज देखनी होगी।
निर्देशन
फिल्म में अगर निर्देशन की बात की जाए तो फिल्म का निर्देशन निकोलस खरकोंगोर ने बेहद सादगी भरे तरीके से किया है। सीरीज की खास बात उसकी सादगी है जो उसे बिना जरूरत की नाटकीयता से दूर करती है। शोर-शराबे और अडल्ट कंटेंट से दूर एक पारिवारिक अनुभव देती है। हालांकि मैथ्स की इक्वेशन वाला प्वाइंट दर्शकों को कुछ खास पसंद नहीं आएगा। संक्षेप में कहा जाए तो पूरी सीरीज भावनाओं का एक संतुलन बना कर चलती है कहीं कहीं बिना जरूरत के खींची हुई भी लगती है।

अभिनय
मोना सिंह उन अभिनेत्रियों में से हैं जो हर किरदार को बहुत नैचुरल अंदाज में निभाती हैं। सीरीज में विनीता एक ऐसी मां के रूप में दिखती हैं जो पारंपरिक सोच से अलग, खुले और आधुनिक नजरिए वाली महिला है।
भूमिका में मोना सिंह ने सहज और भरोसेमंद अभिनय किया है, जिससे उनका किरदार बेहद वास्तविक लगता है। अगस्त्य के रोल में मिहिर आहुजा एक जिम्मेदार और संवेदनशील बेटे के रूप में नजर आते हैं। एक इमोशनल किरदार पर उनकी पकड़ मजबूत लगती है।
अंगिरा धर ने अपना रोल अच्छा निभाया है। रणवीर बरार, जो पेशे से शेफ हैं, कुछ सीन में अपने सहज अभिनय से ध्यान खींचते हैं। बाकी कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में कहानी को मजबूती देते हैं।