ईरान डील पर Israel-US दोस्ती में दरार ! नेतन्याहू का गुस्सा सातवें आसमान पर, ट्रंप से 1 घंटा झगड़े बाद कहा-"गलती मत करना"

Edited By Updated: 21 May, 2026 12:39 PM

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Donald Trump और Benjamin Netanyahu के बीच ईरान युद्ध और शांति वार्ता को लेकर तीखी टेलीफोन बातचीत हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक नेतन्याहू युद्ध फिर शुरू करना चाहते हैं, जबकि ट्रंप बातचीत को मौका देना चाहते हैं। फोन कॉल के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेहद...

International Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू   के बीच ईरान युद्ध को लेकर फोन पर तीखी बातचीत हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चर्चा हुई, लेकिन बातचीत काफी तनावपूर्ण रही। बताया जा रहा है कि ट्रंप फिलहाल ईरान के साथ बातचीत और शांति समझौते को मौका देना चाहते हैं। वहीं नेतन्याहू का मानना है कि ईरान पर दोबारा सैन्य हमला किया जाना चाहिए, ताकि उसकी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को और कमजोर किया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक फोन कॉल के बाद नेतन्याहू बेहद नाराज थे। एक अमेरिकी सूत्र ने कहा कि उनका “गुस्सा सातवें आसमान पर था।” इस समय कतर, पाकिस्तान, सऊदी अरब (Qatar, Pakistan, Saudi Arabia) और दूसरे देश अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं।

 

बताया जा रहा है कि एक नया शांति प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान “सही जवाब” देता है तो समझौता हो सकता है, लेकिन अगर बातचीत असफल रही तो सैन्य कार्रवाई भी हो सकती है।वहीं इजराइल को डर है कि बातचीत के दौरान ईरान समय हासिल कर रहा है और अपनी ताकत बढ़ा सकता है। इसी वजह से नेतन्याहू शांति वार्ता को लेकर ज्यादा भरोसे में नहीं दिख रहे। न देशों की मदद से एक “Letter of Intent” यानी प्रारंभिक समझौते का मसौदा तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद युद्ध को रोकना और ईरान के साथ नई बातचीत शुरू करना है। इस प्रस्ताव में कई बड़े मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना, अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में राहत और ईरान के फ्रीज किए गए पैसों को जारी करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक नेतन्याहू इस पूरी प्रक्रिया से खुश नहीं हैं। उन्हें डर है कि ईरान बातचीत के जरिए समय हासिल कर रहा है और बाद में फिर अपनी सैन्य ताकत बढ़ा सकता है। इजराइल का मानना है कि अभी दबाव कम करना भविष्य में बड़ा खतरा बन सकता है। इसी वजह से नेतन्याहू चाहते हैं कि इजराइल और अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखें। बताया जा रहा है कि फोन कॉल के बाद नेतन्याहू बेहद नाराज थे। एक अमेरिकी सूत्र ने दावा किया कि उनका “गुस्सा सातवें आसमान पर था।” वहीं ट्रंप का मानना है कि अभी भी समझौते की संभावना खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान “सही जवाब” देता है तो युद्ध टाला जा सकता है। लेकिन उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो सैन्य कार्रवाई बहुत तेजी से हो सकती है।

 

ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना जरूरी है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। अगर यहां तनाव बढ़ता है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ईरान की तरफ से कहा गया है कि वह अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। हालांकि अभी तक किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल पश्चिम एशिया की स्थिति अभी बेहद नाजुक बनी हुई है। अगर बातचीत विफल हुई या इजराइल ने दोबारा हमला किया तो बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। इसका असर तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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