Review: शोर-शराबे से दूर, किरदारों की कॉमेडी, वन टू चा चा चा का ईमानदार सफर

Updated: 15 Jan, 2026 06:11 PM

one two cha cha chaa review in hindi

यहां पढ़ें कैसी है फिल्म वन टू चा चा चा

मूवी रिव्यू: वन टू चा चा चा (One Two Cha Cha Chaa)
कलाकार: आशुतोष राणा (Ashutosh Rana), ललित प्रभाकर (Lalit Prabhakar), अनंत विजय जोशी (Anant Vijay Joshi), नायेरा बनर्जी (Nayera Banerjee), हर्ष मायर (Harsh Mayer), मुकेश तिवारी (Mukesh Tiwari), अशोक पाठक (Ashok Pathak), चितरंजन गिरी (Chittaranjan Giri), हेमल इंगले (Hemal Ingle), अभिमन्यु सिंह (Abhimanyu Singh)
निर्देशन: अभिषेक राज खेमका (Abhishek Raj Khemka), रजनीश ठाकुर (Rajneesh Thakur)
रेटिंग: 3 स्टार

One Two Cha Cha Chaa: इस हफ्ते रिलीज़ हो रही ‘वन टू चा चा चा’ एक ऐसी कॉमेडी फिल्म है जो सिचुएशन और किरदारों के ज़रिये हंसी पैदा करती है। आजकल की चीखती-चिल्लाती और द्विअर्थी कॉमेडी से हटकर यह फिल्म अपेक्षाकृत सधा हुआ और साफ मनोरंजन परोसने की कोशिश करती है।

फिल्म की कास्टिंग ही इसकी पहली जीत है। खास तौर पर आशुतोष राणा को एक कॉमिक अवतार में देखना दर्शकों के लिए ताज़ा अनुभव है। गंभीर भूमिकाओं में जमे रहने वाले राणा यहाँ पूरी तरह अलग अंदाज़ में नज़र आते हैं और फिल्म की कॉमेडी की धुरी बनते हैं।

कहानी
कहानी की शुरुआत बिहार के मोतिहारी से होती है, जहाँ जयसवाल परिवार में बड़े बेटे संजू (ललित प्रभाकर) की शादी की तैयारियां चल रही हैं। इसी दौरान परिवार के सनकी और बाइपोलर चाचा वेद प्रकाश जयसवाल (आशुतोष राणा) अचानक अपनी शादी का ऐलान कर देते हैं। यह फैसला पूरे परिवार को असमंजस में डाल देता है।

डॉक्टर की सलाह पर चाचा को रांची के एक मानसिक संस्थान ले जाने का फैसला होता है। दो भतीजे और एक दोस्त बेहोश और बंधे चाचा को वैन में लेकर निकलते हैं, लेकिन यह यात्रा एक साधारण सफ़र नहीं रह जाती। रास्ते में निलंबित नारकोटिक्स अधिकारी, डांसर शोमा, जेल से भागा अपराधी भूरा सिंह और एक जरूरत से ज्यादा उत्साही पुलिसवाला कहानी में शामिल होते जाते हैं।

इसके बाद फिल्म पूरी तरह एक अराजक रोड ट्रिप में बदल जाती है जहाँ गोलियाँ भी चलती हैं, बैंक डकैती भी होती है और ड्रग्स का जखीरा भी हाथ लगता है। कहानी भले ही ओवर-द-टॉप लगे, लेकिन अपने तय दायरे में तार्किक बनी रहती है और दर्शक को बांधे रखती है।

अभिनय
फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ आशुतोष राणा हैं। चाचा के रूप में उनकी बॉडी लैंग्वेज, एक्सप्रेशंस और संवाद अदायगी किरदार को जीवंत बनाती है। वे इस भूमिका को महज़ मज़ाक नहीं बनने देते, जिससे कॉमेडी स्वाभाविक लगती है।
अभिमन्यु सिंह अपने सीमित लेकिन प्रभावशाली सीन में गहरी छाप छोड़ते हैं। नायरा बनर्जी, अनंत विजय जोशी, हर्ष मायर, अशोक पाठक, चितरंजन गिरी और हेमल इंगले भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में संतुलित प्रदर्शन करते हैं और कहानी की रफ्तार बनाए रखते हैं।

निर्देशन
निर्देशक जोड़ी अभिषेक राज खेमका और रजनीश ठाकुर ने फिल्म को सिचुएशनल कॉमेडी की राह पर बनाए रखा है। चूंकि फिल्म का बड़ा हिस्सा रोड जर्नी पर आधारित है, इसलिए कुछ हिस्से खिंचे हुए महसूस होते हैं, लेकिन किरदारों की केमिस्ट्री उन्हें संभाल लेती है।

फिल्म के संवाद इसकी जान हैं सरल, मौके के मुताबिक और बिना ज़्यादा कोशिश के हंसी पैदा करने वाले। यही कारण है कि कई दृश्य असर छोड़ते हैं।

रिव्यू
‘वन टू चा चा चा’ एक ईमानदार और किरदार-आधारित सिचुएशनल कॉमेडी है। अगर आप बिना ज़्यादा दिमाग लगाए हल्की-फुल्की कॉमेडी और एक अलग तरह की रोड ट्रिप का मज़ा लेना चाहते हैं, तो यह फिल्म सिनेमाघर में देखी जा सकती है।

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