Edited By Prachi Sharma,Updated: 15 Oct, 2026 01:51 PM
Rajpal Yadav Cheque Bounce Case : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राजपाल यादव के लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। कोर्ट ने ध्यान दिया कि अभिनेता ने अपनी रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं।
Rajpal Yadav Cheque Bounce Case : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राजपाल यादव के लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। कोर्ट ने ध्यान दिया कि अभिनेता ने अपनी रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं। शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह यादव का पासपोर्ट वापस कर दे, ताकि वे विदेश में अपने पेशेवर काम के लिए जा सकें। हालांकि, इसके लिए उन पर कुछ शर्तें लागू होंगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि जमा की गई रकम और दोनों पक्षों द्वारा उठाए गए मुद्दों को देखते हुए, इस मामले को आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है। पीठ ने कहा, "याचिकाकर्ताओं (यादव और उनकी पत्नी) ने रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं। उठाए गए मुद्दों को देखते हुए, हमें लगता है कि मध्यस्थता के जरिए इस मामले को आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे इस विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त करेंगे। पीठ ने आदेश दिया, "दोनों पक्ष मध्यस्थ से संपर्क करें और पेश होने की तारीख तय करें। मध्यस्थ दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन पेश होने के लिए कह सकते हैं। याचिकाकर्ता नंबर 1 (यादव) को अपना पेशेवर काम जारी रखने की अनुमति देने के लिए, ट्रायल कोर्ट उनका पासपोर्ट वापस कर दे, लेकिन इसके साथ कोर्ट कुछ शर्तें भी लगा सकता है। याचिकाकर्ता (अभिनेता) को केवल उन शर्तों का पालन करते हुए ही यात्रा करनी होगी और वापस लौटने पर ट्रायल कोर्ट को सूचित करना होगा।
यादव के वकील विक्रांत ने अदालत से आग्रह किया कि अभिनेता को एक पेशेवर काम के सिलसिले में कनाडा जाना है, और वहां जाने पर उन्हें कुछ पैसे भी मिल सकते हैं।
सुनवाई के दौरान, यादव के वकील ने बताया कि अभिनेता ने कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन करते हुए पूरे 2 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि चेक बाउंस के सात मामलों में उनकी सजा (तीन महीने की जेल) को चुनौती देने वाली याचिका पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाए। CJI ने शुरुआत में कहा कि कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा, लेकिन बाद में उन्होंने दोनों पक्षों से विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने पर विचार करने को कहा।
CJI ने प्रतिवादी से कहा, "आप लोग अब इस विवाद को क्यों नहीं सुलझा लेते ? अगर आप समझदारी और निष्पक्षता से काम लें... तो हमारे पास 2 करोड़ रुपये जमा हैं। आपको भी समझदारी दिखानी चाहिए और मामले को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। यादव के वकील ने बताया कि अभिनेता ने पैसों का इंतजाम करने के लिए अपनी पुश्तैनी संपत्ति बेच दी है। हालांकि, CJI ने कहा कि इस चरण में कोर्ट के दखल देने की गुंजाइश सीमित है।
7 अक्टूबर को, CJI ने अभिनेता से एक अच्छी फिल्म बनाने, लोगों का फिर से मनोरंजन करने और अपनी छवि सुधारने के लिए कहा था। बेंच ने चेक बाउंस के लंबे समय से चल रहे मामलों में उनके द्वारा किए गए 1.15 करोड़ रुपये के भुगतान पर भी ध्यान दिया। यह कानूनी विवाद 2010 के एक वित्तीय समझौते से जुड़ा है, जिसमें यादव को अपनी पहली निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' के लिए 'M/s मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' से 5 करोड़ रुपये मिले थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2013 में, यादव ने 2010 में फिल्म के लिए मिली 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता को चुकाने के लिए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए थे।
फर्म का आरोप है कि ये चेक बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, 2012 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज सहित लगभग 11 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई थी। 15 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने यादव को सरेंडर करने से मिली छूट को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था। 8 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने यादव की याचिका पर नोटिस जारी किया और कहा कि अगर वे कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा कर देते हैं, तो उन्हें सरेंडर करने से छूट मिल जाएगी।
10 जुलाई को, दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस के कई मामलों में यादव की दोषसिद्धि (conviction) को बरकरार रखा और उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई। हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि के खिलाफ याचिकाएं दायर करने में हुई 1,894 दिनों (यानी पांच साल से अधिक) की असाधारण देरी को माफ करने से इनकार कर दिया। साथ ही, कोर्ट ने यादव को निर्देश दिया कि वे सात अलग-अलग शिकायतों में से प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करें।
हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अभिनेता द्वारा पहले ही चुकाए गए लगभग 2 करोड़ रुपये को इसमें समायोजित कर लिया जाएगा। इसके अलावा, यादव को इस फैसले के खिलाफ अपील कोर्ट में जाने का समय देने के लिए, कोर्ट ने सजा के अमल पर दो महीने के लिए रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने अभिनेता की पत्नी, राधा राजपाल यादव को भी आदेश दिया कि वे हर मामले में शिकायतकर्ता को जुर्माने के तौर पर लगभग 5.5 लाख रुपये का भुगतान करें। कोर्ट ने कहा कि यदि वे जुर्माना नहीं भरती हैं, तो उन्हें तीन महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी।
हाई कोर्ट का यह फैसला यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर उन पुनरीक्षण याचिकाओं पर आया है, जिनमें उन्होंने सेशन कोर्ट के 2019 के फैसले को चुनौती दी थी। सेशन कोर्ट ने अप्रैल 2018 में चेक बाउंस के मामलों में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा सुनाई गई उनकी सजा को बरकरार रखा था। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अभिनेता को छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में घटाकर तीन महीने कर दिया गया था।