Review: छोटे शहर की बड़ी कहानी है रजनी की बारात, इमोशन और कॉमेडी का शानदार मेल

Edited By Updated: 27 May, 2026 03:45 PM

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यहां पढ़ें कैसी है फिल्म रजनी की बारात

फ़िल्म: रजनी की बारात (Rajni Ki Baraat)
कलाकार: उल्का गुप्ता (Ulka Gupta), अश्वथ भट्ट (Ashwath Bhatt), सुनीता राजवार (Sunita Rajwar), जरीना वहाब (Zarina Wahab), कनिष्क विजय (Kanishk Vijay)
निर्देशक: आदित्य अमन (Aditya Aman)
निर्माता: तनाया आडारकर (Tanaya Adarkar) और तेज एच आडारकर (Tej H Adarkar)
एसोसिएट प्रोड्यूसर: मोहसिन ख़ान (Mohsin khan)
रेटिंग : 3*

 

Rajni Ki Baraat: इस शुक्रवार रिलीज़ हो रही फ़िल्म “रजनी की बारात” छोटे शहरों की मिट्टी से निकली एक ऐसी दिलचस्प कहानी है, जो प्यार, साहस और सामाजिक सोच को एक साथ पर्दे पर पेश करती है। निर्देशक आदित्य अमन ने इस फिल्म को सिर्फ एक साधारण लव स्टोरी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आत्मसम्मान और महिलाओं की स्वतंत्र सोच से जोड़कर एक नया आयाम दिया है। बिहार के दरभंगा की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म कॉमेडी, इमोशन और फैमिली ड्रामा का बेहतरीन मिश्रण बनकर सामने आती है। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि यहां नायिका खुद अपनी जिंदगी और प्यार के लिए लड़ाई लड़ती नजर आती है।

कहानी
कहानी रजनी (उल्का गुप्ता) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पिता की यादों के सहारे जिंदगी जी रही एक बेबाक और साहसी लड़की है। वह शर्मीले स्वभाव के रज्जन (कनिष्क विजय) से प्यार करती है, लेकिन दोनों की प्रेम कहानी में सबसे बड़ी रुकावट बनकर सामने आते हैं रज्जन के पिता और सख्त दरोगा मलखान सिंह (अश्वथ भट्ट)। मलखान सिंह अपने बेटे की शादी एक रसूखदार परिवार में तय कर देते हैं। कहानी में असली मोड़ तब आता है जब रजनी अपने प्यार को पाने के लिए खुद बारात लेकर निकल पड़ती है। छोटे शहर के दोस्त, परिवार और लोकल माहौल कहानी को और भी दिलचस्प बना देते हैं। फिल्म में कई भावनात्मक और मजेदार मोड़ दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं।

एक्टिंग
अभिनय की बात करें तो फिल्म की जान उल्का गुप्ता हैं। उन्होंने रजनी के किरदार में भावुकता, जिद और आत्मविश्वास को बेहद शानदार तरीके से निभाया है। हर दृश्य में उनका अभिनय प्रभाव छोड़ता है। अश्वथ भट्ट ने मलखान सिंह के रोल में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है और उनका बिहारी लहजा किरदार को और मजबूत बनाता है। कनिष्क विजय ने शांत और संकोची प्रेमी के रूप में अच्छा काम किया है। वहीं सुनीता राजवार और जरीना वहाब ने मां और दादी के किरदारों में मध्यमवर्गीय परिवार की भावनाओं को बेहद स्वाभाविक अंदाज में पेश किया है। सहायक कलाकारों ने भी फिल्म के हास्य और मनोरंजन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।

डायरेक्शन 
निर्देशक आदित्य अमन ने छोटे शहर की संस्कृति, बिहारी भाषा और पारिवारिक माहौल को बेहद वास्तविक अंदाज में पर्दे पर उतारा है। फिल्म का स्क्रीनप्ले संतुलित है और ड्रामा कहीं भी जरूरत से ज्यादा भारी नहीं लगता। बिहार की खूबसूरत लोकेशंस को जिस तरीके से फिल्माया गया है, वह फिल्म को विजुअली आकर्षक बनाता है। संवादों में देसीपन है और हल्की-फुल्की कॉमेडी कहानी को सहज बनाए रखती है। निर्देशक ने पारंपरिक सोच और बदलते समाज के बीच के संघर्ष को मनोरंजक अंदाज में पेश करने में सफलता हासिल की है।

कुल मिलाकर, “रजनी की बारात” एक दिल छू लेने वाली, मनोरंजक और सकारात्मक संदेश देने वाली फिल्म है। यह फिल्म बताती है कि प्यार में पहल करने का हक सिर्फ लड़कों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों की भावनाओं, पारिवारिक रिश्तों और आत्मनिर्भर बेटियों की सोच को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म एक शानदार अनुभव साबित हो सकती है। बेहतरीन अभिनय, भावनात्मक कहानी और देसी अंदाज से भरपूर यह फिल्म इस हफ्ते की एक मस्ट वॉच फिल्म कही जा सकती है।

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