Interview: असल कोर्टरूम में कोई ड्रामा नहीं होता, सब बहुत सामान्य तरीके से चलता है - सोनाक्षी सिन्हा

Edited By Updated: 22 May, 2026 10:16 AM

series starcast exclusive interview with punjab kesari

इस सीरीज के बारे में सोनाक्षी सिन्हा, ज्योतिका, और आशुतोष गोवारिकर ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 22 मई से अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज़ होने वाली ‘सिस्टम’ सिर्फ एक वेब सीरीज़ नहीं, बल्कि समाज और कानूनी सिस्टम की सच्चाई को पर्दे पर लाने वाला कोर्टरूम ड्रामा है। अश्विनी  अय्यर तिवारी के निर्देशन में बनी यह कहानी हाई-प्रोफाइल पब्लिक प्रोसीक्यूटर और एक कोर्टरूम स्टेनोग्राफर के जीवन के इर्द गिर्द घूमती है। इसमें सोनाक्षी सिन्हा, ज्योतिका, और आशुतोष गोवारिकर मुख्य भूमिकाओं में हैं, जिनका दमदार प्रदर्शन इसे देखने लायक बनाता है। इस सीरीज के बारे में सोनाक्षी सिन्हा, ज्योतिका, और आशुतोष गोवारिकर ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

ज्योतिका

सवाल: फिल्म को इतना रियलिस्टिक बनाने के लिए आपने कैसी तैयारी की?

जवाब- सबसे पहले हमने आम इंसान की जिंदगी को समझने की कोशिश की। जैसे रोजमर्रा की भागदौड़, बस-ट्रेन में सफर करना, हर वक्त समय को लेकर भागते रहना। फिर हमने उन परिवारों की भावनाओं को महसूस करने की कोशिश की जिन्हें समय पर न्याय नहीं मिलता। जब कोर्ट में अगली तारीख का इंतजार होता है, तब उनके अंदर क्या चलता है, वह समझना बहुत जरूरी था। तैयारी बाहर से ज्यादा अंदर की थी, क्योंकि किरदार इतने खूबसूरती से लिखे गए थे कि बस उन्हें सच्चाई के साथ निभाना ही सबसे बड़ी तैयारी थी।

सवाल: भारत में लोगों को कानून की पर्याप्त जानकारी नहीं है। क्या स्कूलों में कानून की पढ़ाई होनी चाहिए?

जवाब – बिल्कुल होनी चाहिए। इसके अलावा ये इंटरेस्ट पर भी निर्भर करता है पर हा कानून पढ़ाना चाहिए। ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो हम स्कूल में नहीं कर रहे हैं। सिर्फ कानून ही नहीं बल्कि फाइनेंस, टैक्स और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई जरूरी विषय स्कूलों में पढ़ाए जाने चाहिए। कई बार लोगों की रुचि नहीं होती, लेकिन ऐसी चीजें बेसिक एजुकेशन का हिस्सा होनी चाहिए।

सवाल: अब आपको पहले से ज्यादा मजबूत और अलग तरह के किरदार मिल रहे हैं। इस बदलाव को कैसे देखती हैं?

जवाब – मैं पिछले 17 सालों से काम कर रही हूं और अब जाकर मुझे सबसे दिलचस्प किरदार मिल रहे हैं। मैंने साउथ में बहुत अलग-अलग किरदार निभाए हैं गूंगी लड़की, अंधी लड़की, क्लासिकल डांसर सब कुछ किया है। लेकिन 40+ की उम्र के बाद एक नया फेज आता है, जहां आपको बेहद layered और grey shades वाले किरदार मिलते हैं। OTT प्लेटफॉर्म्स ने इस बदलाव में बहुत बड़ा रोल निभाया है। मेरे एज ग्रुप के लिए आज बहुत अच्छे किरदार लिखे जा रहे हैं।

सोनाक्षी सिन्हा 

सवाल: आपने पहली बार वकील का किरदार निभाया है। तैयारी कैसी रही?

जवाब – सच कहूं तो हमारे दिमाग में कोर्टरूम ड्रामा की जो छवि होती है, वह बहुत हाई-वोल्टेज और ओवर-द-टॉप होती है। लेकिन निर्देशक अश्विनी जी ने मुझे कहा कि असली कोर्ट की कार्यवाही देखो। उन्होंने मुझे यूट्यूब पर रियल कोर्ट प्रोसीडिंग्स देखने को कहा। जब मैंने देखा तो मैं खुद हैरान रह गई, क्योंकि वहां कोई चिल्लाना या ड्रामा नहीं होता। सब बहुत सामान्य तरीके से बात करते हैं। उसी रियलिज्म को पकड़ना था। मेरा किरदार नेहा परफेक्ट नहीं है। वह गलतियां करती है, सीखती है और आगे बढ़ती है। यही चीज उसे इंसानी और दिलचस्प बनाती है।

सवाल: फिल्म में एक वक्त ऐसा आता है जब आपका किरदार रिश्ते और प्रोफेशन के बीच प्रोफेशन को चुनता है। क्या निजी जिंदगी में ऐसा फैसला लेना आसान होता?

जवाब – मेरी निजी जिंदगी में ऐसी स्थिति कभी नहीं आई, लेकिन फिल्म के किरदार की बात करूं तो नेहा वही करती है जो उसके पिता ने उसे सिखाया है। उसके पिता ने ही उसे मजबूत बनाया है। इसलिए अगर उसे सच के लिए अपने पिता के खिलाफ भी खड़ा होना पड़े, तो वह खड़ी होती है। यही फिल्म में पिता-बेटी के रिश्ते की सबसे खूबसूरत बात है।

सवाल: ‘दहाड़’ के नए सीजन को लेकर कितनी एक्साइटेड हैं?

जवाब – बहुत ज्यादा। मैं फिर से यूनिफॉर्म पहनकर अंजली मेघवाल का किरदार निभा रही हूं। ‘दहाड़’ मेरे लिए बहुत खास प्रोजेक्ट था। उस वक्त मैं ऐसे किरदार ढूंढ रही थी जो असर छोड़ें। रीमा और जोया यह किरदार लेकर आईं और यह मेरे लिए किसी नए जन्म जैसा था। मैं बहुत उन डायरेक्टर्स की आभारी हूं। अभी शूटिंग चल रही है इसलिए ज्यादा नहीं बता सकती, लेकिन इतना जरूर कहूंगी कि नया सीजन पहले से भी ज्यादा दमदार होगा।

आशुतोष गोवारिकर

सवाल: आपका स्क्रीन प्रेजेंस बेहद दमदार लगा। आपके लिए यह किरदार कितना चुनौतीपूर्ण था?

जवाब – मुझे हमेशा से कोर्टरूम ड्रामा पसंद रहे हैं। जब यह फिल्म ऑफर हुई तो मैं बहुत उत्साहित था। मैंने पहले कभी वकील का किरदार नहीं निभाया था, इसलिए यह मेरे लिए नया अनुभव था। अश्विनी जी ने मुझे भी कुछ असली कोर्ट के वीडियो देखने को दिए। वहां देखकर मैं भी चौंक गया, क्योंकि फिल्मों में कोर्टरूम बहुत नाटकीय दिखाया जाता है, लेकिन असल में सब बहुत सहज तरीके से होता है। उसी वास्तविकता को पकड़ना जरूरी था। रिसर्च और रीडिंग्स के जरिए मुझे अपने किरदार रवि राजवंश को समझने में मदद मिली।

सवाल: एक निर्देशक होने के बाद जब आप बतौर अभिनेता सेट पर जाते हैं, तो क्या अंदर का निर्देशक जाग जाता है?

जवाब – नहीं, बिल्कुल नहीं। जब मैं निर्देशन करता हूं, तब मेरा पूरा ध्यान कहानी और पूरी टीम पर होता है। लेकिन जब मैं अभिनय करता हूं तब मैं खुद को पूरी तरह निर्देशक के हवाले कर देता हूं। मुझे गर्व है कि मैं एक डायरेक्टर का एक्टर हूं। निर्देशक जिस तरह मुझे ढालना चाहता है मैं उसी तरह खुद को ढालने की कोशिश करता हूं।

सवाल: क्या कभी ऐसे एक्टर्स मिले जो Director’s Actor नहीं थे?

जवाब – बहुत मिले। लेकिन हर अभिनेता का अपना तरीका होता है। कोई मेथड एक्टिंग करता है, कोई पूरी तरह spontaneous होता है। निर्देशक का काम होता है उन सभी के तरीके को समझना और सम्मान देना। अगर कोई मेथड एक्टर पूछता है कि मैं यहां से वहां क्यों जा रहा हूं? तो निर्देशक को उसका जवाब देना चाहिए। यही निर्देशन की असली तैयारी होती है।

सवाल: आपके आने वाले प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से हैं?

जवाब – मैं इस समय कई अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा हूं। एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज बना रहा हूं जिसका नाम टेंपल रेडर्स है। यह भारत से चोरी होने वाली प्राचीन मूर्तियों और उनके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कहानी है कैसे मूर्तियां मंदिरों से चोरी होकर विदेशों के म्यूजियम और प्राइवेट कलेक्टर्स तक पहुंचती हैं। इसके अलावा एक मराठी फिल्म प्रोड्यूस कर रहा हूं और एक वेब सीरीज भी बना रहा हूं।

सवाल: क्या ‘लगान’ या ‘स्वदेश’ जैसी फिल्मों के सीक्वल की कोई संभावना है?

जवाब – लगान और स्वदेश में जो कहना था वह उस समय कह दिया गया। उन भावनाओं को दोबारा उसी सच्चाई के साथ लाना आसान नहीं होता। अगर कभी कोई सच्ची और जरूरी कहानी होगी तभी सीक्वल बनना चाहिए। सिर्फ पुरानी कहानी दोहराने के लिए समय देना मुझे सही नहीं लगता। बेहतर है नई कहानियां सुनाई जाएं।

 

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