Edited By Mansa Devi,Updated: 15 Mar, 2026 11:03 AM

विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की पसंद में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है। अब बड़ी संख्या में छात्र पारंपरिक देशों के साथ-साथ Spain, Germany, Singapore, United Arab Emirates और South Korea जैसे देशों को भी अपनी पढ़ाई के लिए चुन...
इंटरनेशनल डेस्क: विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की पसंद में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है। अब बड़ी संख्या में छात्र पारंपरिक देशों के साथ-साथ Spain, Germany, Singapore, United Arab Emirates और South Korea जैसे देशों को भी अपनी पढ़ाई के लिए चुन रहे हैं। एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि इन देशों में अपेक्षाकृत कम खर्च और अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलने के कारण भारतीय छात्रों का झुकाव तेजी से बढ़ रहा है।
पारंपरिक देशों की लोकप्रियता अब भी बरकरार
शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी Auxilo Finserve की एक रिपोर्ट के अनुसार United States, Canada, United Kingdom और Australia जैसे देश अब भी भारतीय छात्रों के लिए काफी लोकप्रिय बने हुए हैं। खासतौर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित यानी STEM से जुड़े पाठ्यक्रमों के लिए इन देशों को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि अब छात्र पढ़ाई के लिए अन्य देशों को भी तेजी से विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
कम खर्च और आसान वीजा प्रक्रिया बना रहे आकर्षक
रिपोर्ट में बताया गया है कि छात्रों की पसंद में यह बदलाव कई कारणों से हो रहा है। इनमें कम खर्च में पढ़ाई, अच्छे विश्वविद्यालय, वीजा नियमों की सरल प्रक्रिया, पढ़ाई के दौरान प्रशिक्षण के अवसर और पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी मिलने की बेहतर संभावना शामिल हैं। इसके अलावा छात्रों की सुरक्षा और रहने की बेहतर सुविधाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
छात्र अब फैसले अधिक सोच-समझकर ले रहे
Auxilo Finserve में विदेशी शिक्षा ऋण से जुड़ी प्रमुख अधिकारी Shweta Guru के अनुसार आज के भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई के फैसले को लेकर पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक हो गए हैं। वे केवल किसी देश की लोकप्रियता के आधार पर निर्णय नहीं लेते, बल्कि यह भी देखते हैं कि पढ़ाई पर होने वाले खर्च के बदले उन्हें क्या फायदे मिलेंगे।
स्पेन, जर्मनी और न्यूजीलैंड में बढ़ी मांग
उन्होंने बताया कि Spain, Germany और New Zealand जैसे देशों में पढ़ाई के लिए छात्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन देशों में पढ़ाई का खर्च अपेक्षाकृत कम है और शिक्षा की गुणवत्ता भी अच्छी मानी जाती है। साथ ही वीजा प्रक्रिया स्पष्ट और आसान है। पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के अवसर भी बेहतर मिलते हैं, खासकर स्नातकोत्तर स्तर पर और STEM से जुड़े विषयों में।
पढ़ाई का खर्च भी है कम
रिपोर्ट के अनुसार यूरोप के कई नए शिक्षा केंद्रों में वर्ष 2023 से 2025 के बीच भारतीय छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। इन देशों में पढ़ाई का कुल खर्च औसतन 18 लाख से 40 लाख रुपये प्रति वर्ष तक होता है। इसके मुकाबले United Kingdom जैसे पारंपरिक देशों में यही खर्च लगभग 60 लाख से 90 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकता है।
पढ़ाई के बाद नौकरी मिलने में भी कम समय
रोजगार के अवसरों के मामले में भी इन नए देशों को बेहतर माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक Germany, Spain और अन्य उभरते देशों में पढ़ाई पूरी करने के बाद औसतन छह से नौ महीने के भीतर नौकरी मिलने की संभावना रहती है। वहीं पारंपरिक देशों में यह समय लगभग नौ से 15 महीने तक हो सकता है।
शुरुआती वेतन में भी अच्छा अवसर
वेतन के मामले में भी अंतर देखा जाता है। इन नए देशों में शुरुआती वेतन औसतन 25 लाख से 45 लाख रुपये सालाना के बीच हो सकता है। जबकि United States, United Kingdom या Australia जैसे देशों में शुरुआती वेतन लगभग 45 लाख से 75 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकता है।