Edited By Tanuja,Updated: 16 Jun, 2026 01:56 PM

यूएई के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास 17 मई 2026 को हुए ड्रोन हमले की अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, यूरोपीय संघ, सऊदी अरब, जापान और पाकिस्तान समेत 80 से अधिक देशों ने संयुक्त रूप से निंदा की है। देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए...
International Desk: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Barakah Nuclear Energy Plant ) के निकट 17 मई 2026 को हुए ड्रोन हमले की दुनिया के 80 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने संयुक्त रूप से कड़ी निंदा की है। हस्ताक्षरकर्ताओं में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, यूरोपीय संघ, सऊदी अरब, जापान, पाकिस्तान और कई अन्य देश शामिल हैं। संयुक्त बयान के अनुसार, यह हमला इराक में सक्रिय सशस्त्र गुटों द्वारा किया गया था और इसका निशाना बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र की आंतरिक सुरक्षा सीमा के बाहर स्थित विद्युत अवसंरचना थी। हालांकि संयंत्र को कोई प्रत्यक्ष नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन इस घटना ने परमाणु सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
संयुक्त बयान में कहा गया कि यह हमला United Nations चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन है और इससे क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है। देशों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा हमला सफल होता, तो इससे रेडियोधर्मी रिसाव, पर्यावरणीय क्षति और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते थे, जिनका असर सीमाओं से परे भी महसूस किया जाता। हस्ताक्षरकर्ताओं ने यूएई की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के प्रति अपना समर्थन दोहराया और सभी देशों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र का इस्तेमाल गैर-राज्य तत्वों द्वारा दूसरे देशों पर हमलों के लिए न होने दें। बयान में यूएई के अधिकारियों की सराहना भी की गई, जिन्होंने हमले के तुरंत बादअंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को पूरी जानकारी दी। जांच में संयंत्र के आसपास विकिरण स्तर सामान्य पाए गए और किसी प्रकार की परमाणु दुर्घटना नहीं हुई।
संयुक्त बयान में कहा गया कि बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण और संचालन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया गया है। यह संयंत्र यूएई की Federal Authority for Nuclear Regulation तथा IAEA की निगरानी में संचालित होता है। दुनिया भर के देशों ने इस घटना को परमाणु अवसंरचना की सुरक्षा के लिए चेतावनी बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की मांग की। बयान में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की भौतिक सुरक्षा, आपदा तैयारी और सुरक्षा क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र अरब दुनिया का पहला वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा केंद्र माना जाता है और यूएई की ऊर्जा रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। यह देश की बिजली जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा करता है और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है।