Edited By Pardeep,Updated: 24 Oct, 2026 06:12 AM

जहां पांच साल की उम्र में अधिकांश बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझने की शुरुआत कर रहे होते हैं, वहीं भारतीय मूल के पांच वर्षीय अर्जुन प्रजापति गणित के जटिल सिद्धांतों, ब्लैक होल्स, मानव शरीर रचना और जेनेटिक्स जैसी गूढ़ गुत्थियों को सुलझाने में जुटे...
टोरंटो/कनाडा: जहां पांच साल की उम्र में अधिकांश बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझने की शुरुआत कर रहे होते हैं, वहीं भारतीय मूल के पांच वर्षीय अर्जुन प्रजापति गणित के जटिल सिद्धांतों, ब्लैक होल्स, मानव शरीर रचना और जेनेटिक्स जैसी गूढ़ गुत्थियों को सुलझाने में जुटे हैं। महज 18 महीने की उम्र से किताबें पढ़ना शुरू करने वाले अर्जुन अब तक 3,000 से ज्यादा किताबें पढ़ चुके हैं। उनकी इस विलक्षण प्रतिभा और जिज्ञासा को देखकर दुनिया भर के वैज्ञानिक और अकादमिक संस्थान हैरान हैं।
4 साल की उम्र में 'मेंसा' और 'इंटरटेल' में पाया प्रवेश
अर्जुन के पिता डॉ. विशाल वी. प्रजापति एक फिजिशियन व क्लिनिकल रिसर्चर हैं और उनकी माता महिता एक वकील हैं। जून 2026 में चार साल और दस महीने की उम्र में हुए 'स्टैनफोर्ड-बिने इंटेलिजेंस स्केल्स' परीक्षण में अर्जुन का फुल स्केल आईक्यू (Full Scale IQ) 141 दर्ज किया गया, जिसने उन्हें आबादी के शीर्ष 99.7वें पर्सेंटाइल में ला खड़ा किया। इसके अलावा उनका नॉन-वर्बल आईक्यू 149, फ्लूइड रीजनिंग 144 और वर्किंग मेमोरी स्कोर 146 दर्ज हुआ। इस असाधारण बौद्धिक क्षमता के दम पर उन्हें चार साल की उम्र में ही 'मेंसा' (शीर्ष 2% आईक्यू वाले लोगों का समूह) और 'इंटरटेल' (शीर्ष 1% आईक्यू वाले लोगों का समूह) का सदस्य चुन लिया गया।
कनाडाई प्रधानमंत्री ने पत्र लिखकर दी बधाई, संसद में मिलेगा सम्मान
अर्जुन की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने उन्हें एक व्यक्तिगत पत्र भेजकर बधाई दी है। इसके साथ ही ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने भी उन्हें शुभकामनाएं भेजी हैं। अर्जुन विश्वप्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) का दौरा कर चुके हैं। आगामी 29 अक्टूबर 2026 को ओंटारियो की प्रांतीय विधानसभा (क्वींस पार्क) में उन्हें विशेष सम्मान देने के लिए आमंत्रित किया गया है।
1 से 20 तक पहाड़े कंठस्थ, 5वीं कक्षा के स्तर की गणित में रुचि
अर्जुन का रुझान मुख्य रूप से गणित और मेडिकल साइंस में है। उन्हें 1 से 20 तक के पहाड़े याद हैं और वे अंकगणित, वर्ग (squares), घन (cubes) तथा संख्या पैटर्न को आसानी से समझ लेते हैं। वे पांचवीं कक्षा के स्तर के गणितीय सिद्धांतों और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर टैलेंट डेवलपमेंट के जरिए मानव शरीर क्रिया विज्ञान (ह्यूमन फिजियोलॉजी) व सेल बायोलॉजी के कोर्स पूरे कर चुके हैं। अल्बर्ट आइंस्टीन और सर आइजैक न्यूटन उनके पसंदीदा वैज्ञानिक हैं।
'दबाव नहीं, जिज्ञासा को बढ़ावा देना जरूरी': माता-पिता की सीख
अर्जुन के माता-पिता का कहना है कि उनकी परवरिश का मूल मंत्र "दबाव नहीं, प्रोत्साहन देना" (Fostering, Not Forcing) है। अर्जुन के पिता डॉ. विशाल प्रजापति का मानना है कि किसी बच्चे का उच्च आईक्यू उसके ऊपर बोझ या तुलना का जरिया नहीं बनना चाहिए। घर में पढ़ाई का कोई निश्चित टाइम-टेबल थोपने के बजाय वे अर्जुन की स्वाभाविक जिज्ञासा और सीखने की ललक को आगे बढ़ने का मौका देते हैं। तमाम उपलब्धियों के बावजूद पांच साल का यह नन्हा जीनियस अपनी छोटी बहन के साथ खेलने, पेंटिंग करने और संगीत सुनने का भी पूरा आनंद लेता है।