चीन की आर्थिक  रफ्तार घटीः 17.9% युवा बेरोजगारी और रिकॉर्ड ग्रेजुएट्स, गिग वर्कर्स-प्रवासी मजदूरों का भविष्य संकट में

Edited By Updated: 30 Aug, 2026 08:34 PM

china s poor class faces uncertain future amid slowing economy

चीन की धीमी अर्थव्यवस्था के बीच गरीब, ग्रामीण प्रवासी और गिग वर्कर्स का भविष्य अनिश्चित बताया गया है। 30 करोड़ से अधिक प्रवासी मजदूर सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं, जबकि युवा बेरोजगारी 17.9 प्रतिशत है। 2026 में 1.27 करोड़ ग्रेजुएट्स रोजगार बाजार में...

Bejing: चीन की अर्थव्यवस्था अब उस दौर में प्रवेश कर रही है, जहां तेज आर्थिक विकास की जगह धीमी वृद्धि और रोजगार की चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में चीन के गरीब, ग्रामीण प्रवासी मजदूरों और गिग इकॉनमी से जुड़े लाखों श्रमिकों का भविष्य चिंता का विषय बनता जा रहा है। ईस्ट एशिया फोरम में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, चीन सरकार ने अप्रैल 2026 में प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी कीं और अर्थव्यवस्था को खपत आधारित मॉडल की ओर ले जाने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालांकि, लेख में कहा गया है कि ये कदम अभी उन मूल समस्याओं का समाधान नहीं करते, जिनका सामना चीन का असुरक्षित श्रमिक वर्ग कर रहा है।

  

चीन में 30 करोड़ से अधिक ग्रामीण प्रवासी मजदूर हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनके पास स्थायी रोजगार अनुबंध नहीं हैं। इसका मतलब है कि उन्हें सामाजिक बीमा और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। लेख के अनुसार, चीन की हुकौ (Household Registration) व्यवस्था ने लंबे समय से ग्रामीण इलाकों से शहरों में आने वाले मजदूरों को शहरी निवासियों के बराबर सुविधाएं मिलने से रोका है। ये वही मजदूर हैं जिन्होंने चीन के कारखानों, सड़कों और शहरों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन सामाजिक सुरक्षा और बेहतर जीवन की सुविधाओं तक उनकी पहुंच सीमित रही।

 

चीन की तेजी से बढ़ी प्लेटफॉर्म और गिग इकॉनमी ने रोजगार के नए अवसर तो पैदा किए, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आईं। लेख में कहा गया है कि कई प्लेटफॉर्म वर्कर्स एल्गोरिदम आधारित श्रम प्रबंधन के दबाव में काम करते हैं। उन पर कम लागत में अधिक घंटे काम करने का दबाव हो सकता है। नई गाइडलाइंस पर सवाल उठाते हुए लेख में कहा गया है कि इनमें मानकीकृत रोजगार अनुबंध, काम के घंटों की स्पष्ट सीमा, एल्गोरिदम में पारदर्शिता और सभी कर्मचारियों के लिए पूर्ण सामाजिक बीमा जैसे मुद्दों को अनिवार्य रूप से लागू करने की व्यवस्था नहीं है लेख के मुताबिक, वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत रही, जो 2022 के बाद सबसे कमजोर स्तर बताया गया है।

 

धीमी आर्थिक वृद्धि के कारण अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजिंग अर्थव्यवस्था में वास्तविक राजकोषीय पुनर्वितरण करेगा, ताकि गरीब और कम आय वाले वर्गों की आय तथा सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चीन खपत आधारित अर्थव्यवस्था बनना चाहता है, तो आम लोगों की आय और खर्च करने की क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा। चीन में रोजगार की चुनौती युवा वर्ग के लिए भी गंभीर होती जा रही है। लेख में कहा गया है कि जुलाई 2026 में 16 से 24 वर्ष आयु वर्ग की युवा बेरोजगारी दर 17.9 प्रतिशत रही, जिसमें छात्रों को शामिल नहीं किया गया था।  वहीं, 2026 में रिकॉर्ड 1.27 करोड़ विश्वविद्यालय स्नातक रोजगार बाजार में प्रवेश कर रहे हैं। इतने बड़े पैमाने पर नए उम्मीदवारों के आने से पहले से दबाव में चल रहा जॉब मार्केट और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

 

चीन एक ओर युवाओं को रोजगार देने की चुनौती से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर उसकी आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है।  इसी के चलते चीन ने 2025 में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई, जो 1950 के दशक के बाद इस दिशा में पहला बड़ा बदलाव था। इससे श्रम बाजार और युवाओं के रोजगार अवसरों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। लेख के अनुसार, अप्रैल 2026 में प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए घोषित ढांचा केवल शुरुआत है। असली सवाल यह है कि सरकार इन नीतियों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती है।

 

इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चीन 

  • अस्थायी और असुरक्षित कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा कैसे करता है।
  • सामाजिक बीमा का दायरा कितना बढ़ाता है।
  • काम के घंटों को लेकर नियम कितनी सख्ती से लागू करता है।
  • प्लेटफॉर्म कंपनियों के एल्गोरिदम में कितनी पारदर्शिता लाता है।

चीन की तेज आर्थिक वृद्धि ने लंबे समय तक लोगों में यह उम्मीद बनाए रखी कि अगली पीढ़ी बेहतर और सुरक्षित मध्यम वर्ग का हिस्सा बनेगी। लेकिन धीमी अर्थव्यवस्था और कमजोर रोजगार बाजार के बीच अब यही उम्मीद चीन की सबसे बड़ी सामाजिक चुनौतियों में बदलती दिखाई दे रही है।
 
 

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